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अपराध
झारखंड उच्च न्यायालय ने दामाद के घर में बहू को प्रवेश न देने को ‘क्रूरता’ नहीं माना
✍️ Live Law
🗓 05 नव. 2026, 08:02 PM
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झारखंड उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि दामाद के घर में बहू को प्रवेश न देने और अपमानित करने को ‘क्रूरता’ नहीं माना जाता।
झारखंड उच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि दामाद के घर में बहू को प्रवेश न देने और उसे अपमानित करने को घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत ‘क्रूरता’ नहीं माना जाता। इस मामले में, बहू को पारिवारिक निवास से वंचित किया गया और उसके साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया, परंतु अदालत ने पाया कि यह व्यवहार ‘क्रूरता’ की परिभाषा में नहीं आता। न्यायालय ने बताया कि ‘क्रूरता’ के लिए शारीरिक या मनोवैज्ञानिक दुरुपयोग का स्पष्ट पैटर्न होना आवश्यक है, जो इस मामले में मौजूद नहीं था। इस निर्णय से यह संकेत मिलता है कि घरेलू विवादों और वास्तविक दुरुपयोग के बीच स्पष्ट अंतर करना आवश्यक है, साथ ही महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के महत्व पर बल दिया गया है।