📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / wittVikki from ranchi, India
नौकरी
झारखंड की इंजीनियर बनी रैपिडो ड्राइवर, 1.2 लाख कमाई, सवारी में मिली जिंदगी
✍️ The Economic Times
🗓 18 अक्टू. 2026, 09:36 PM
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झारखंड की एक पूर्व‑इंजीनियर ने रैपिडो डिलीवरी में कदम रखा, आय 1.2 लाख तक बढ़ी और नियमित सवारी से मिली अपनी जीवन‑साथी।
झारखंड की एक महिला, जो पहले लगभग ₹40,000 महीने की वेतन वाली इंजीनियर थी, रैपिडो ड्राइवर बन गई। इस बदलाव से उसकी आय में तेज़ी आई और वह अब लगभग ₹1.2 लाख महीने कमाती है, जैसा कि रिपोर्टों में बताया गया है।
व्यक्तिगत परिस्थितियों और गिग‑इकोनॉमी प्लेटफ़ॉर्म द्वारा प्रदान किए गए लचीले कमाई के अवसर ने इस परिवर्तन को प्रेरित किया। रैपिडो ड्राइवर के रूप में वह बड़े ग्राहक वर्ग तक पहुँच सकी और अपनी सुविधा के अनुसार काम कर सकी, जिससे आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
अपने दैनिक रूट में वह एक नियमित सवार से मिली, जो बाद में उसके जीवन‑साथी बन गया। साधारण सवारी से शुरू हुआ यह संबंध धीरे‑धीरे विकसित होकर विवाह तक पहुँचा, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अनौपचारिक कामकाज के माध्यम से व्यक्तिगत जीवन भी प्रभावित हो सकता है।
उनकी कहानी झारखंड जैसे छोटे राज्यों में गिग‑आधारित नौकरियों की बढ़ती आकर्षण को दर्शाती है, जहाँ पेशेवर पारंपरिक वेतन वाली नौकरियों से हटकर रैपिडो जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर उच्च आय और नए सामाजिक संपर्क तलाश रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे बदलाव झारखंड में रोजगार पैटर्न को बदल सकते हैं, क्योंकि अधिक शिक्षित कार्यकर्ता पारंपरिक नौकरियों के अलावा वैकल्पिक आय स्रोतों को अपनाने लगे हैं।
व्यक्तिगत परिस्थितियों और गिग‑इकोनॉमी प्लेटफ़ॉर्म द्वारा प्रदान किए गए लचीले कमाई के अवसर ने इस परिवर्तन को प्रेरित किया। रैपिडो ड्राइवर के रूप में वह बड़े ग्राहक वर्ग तक पहुँच सकी और अपनी सुविधा के अनुसार काम कर सकी, जिससे आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
अपने दैनिक रूट में वह एक नियमित सवार से मिली, जो बाद में उसके जीवन‑साथी बन गया। साधारण सवारी से शुरू हुआ यह संबंध धीरे‑धीरे विकसित होकर विवाह तक पहुँचा, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अनौपचारिक कामकाज के माध्यम से व्यक्तिगत जीवन भी प्रभावित हो सकता है।
उनकी कहानी झारखंड जैसे छोटे राज्यों में गिग‑आधारित नौकरियों की बढ़ती आकर्षण को दर्शाती है, जहाँ पेशेवर पारंपरिक वेतन वाली नौकरियों से हटकर रैपिडो जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर उच्च आय और नए सामाजिक संपर्क तलाश रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे बदलाव झारखंड में रोजगार पैटर्न को बदल सकते हैं, क्योंकि अधिक शिक्षित कार्यकर्ता पारंपरिक नौकरियों के अलावा वैकल्पिक आय स्रोतों को अपनाने लगे हैं।