📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Arkumar 147
राजनीति
जीवन रेड्डी ने कहा, रेवंत ने केलेश्वरम का पूरा उपयोग नहीं किया, टुम्मिडिहत्ती कार्य अधूरे
✍️ Telangana Today
🗓 25 अग. 2026, 07:22 AM
👁 4
वरिष्ठ मंत्री जीवन रेड्डी ने रेवंत की केलेश्वरम जल योजना के अधूरे उपयोग और टुम्मिडिहत्ती परियोजना के निपटारे पर निंदा की।
वरिष्ठ मंत्री जीवन रेड्डी ने हालिया प्रेस ब्रीफ़िंग में कहा कि रेवंत ने केलेश्वरम जल योजना का पूरा उपयोग नहीं किया है और टुम्मिडिहत्ती में कार्य अधूरे छोड़ दिए हैं। यह टिप्पणी राज्य की जल‑संसाधन प्रबंधन के प्रति चिंता व्यक्त करती है और जवाबदेही की मांग करती है।
केलेश्वरम परियोजना, जो तेलंगाना की सबसे बड़ी बहु‑उद्देश्यीय सिंचाई योजना है, लाखों एकड़ को सिंचित करने और जलविद्युत उत्पादन करने के लिए बनाई गई थी। रेड्डी के अनुसार, इस योजना के तहत आवंटित जल और बुनियादी ढाँचा पर्याप्त रूप से उपयोग नहीं किया गया है, जिससे किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहे हैं।
टुम्मिडिहत्ती, एक छोटा लेकिन रणनीतिक जल‑भंडारण और वितरण प्रोजेक्ट, अभी भी अधूरा है। रेड्डी ने बताया कि इस देरी से स्थानीय कृषि गतिविधियों पर असर पड़ा है और परियोजना निगरानी पर सवाल उठे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह आलोचना आगामी चुनावों से पहले विकास प्राथमिकताओं पर चल रहे पार्टी‑अंदर के बहस का हिस्सा है। रेवंत की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है, और राज्य सरकार ने परियोजना की समय‑सीमा की समीक्षा का वादा किया है।
इन बयानों से तेलंगाना की नेतृत्व पर बढ़ते दबाव का पता चलता है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि बड़े‑पैमाने पर चलने वाली योजनाएँ ग्रामीण जनता को ठोस लाभ पहुंचाएँ।
केलेश्वरम परियोजना, जो तेलंगाना की सबसे बड़ी बहु‑उद्देश्यीय सिंचाई योजना है, लाखों एकड़ को सिंचित करने और जलविद्युत उत्पादन करने के लिए बनाई गई थी। रेड्डी के अनुसार, इस योजना के तहत आवंटित जल और बुनियादी ढाँचा पर्याप्त रूप से उपयोग नहीं किया गया है, जिससे किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहे हैं।
टुम्मिडिहत्ती, एक छोटा लेकिन रणनीतिक जल‑भंडारण और वितरण प्रोजेक्ट, अभी भी अधूरा है। रेड्डी ने बताया कि इस देरी से स्थानीय कृषि गतिविधियों पर असर पड़ा है और परियोजना निगरानी पर सवाल उठे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह आलोचना आगामी चुनावों से पहले विकास प्राथमिकताओं पर चल रहे पार्टी‑अंदर के बहस का हिस्सा है। रेवंत की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है, और राज्य सरकार ने परियोजना की समय‑सीमा की समीक्षा का वादा किया है।
इन बयानों से तेलंगाना की नेतृत्व पर बढ़ते दबाव का पता चलता है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि बड़े‑पैमाने पर चलने वाली योजनाएँ ग्रामीण जनता को ठोस लाभ पहुंचाएँ।