🔥 TRENDING मलबे के नीचे से एक कर्मचारी का शव बराम... Arunachal Pradesh Protests 11,200 MW S... ગીર સોમનાથ જિલ્લા, ઉના તાલુકાના નાંદણ... RAF Deployed in Arunachal as SUMP Unre... Centre Deploys RAF Companies to Arunac... South Kashmir Police Seize 16 Vehicles...
26 Oct 2026•
ગુજરાતી मराठी ਪੰਜਾਬੀ বাংলা
Crime

जय अंबे की चार 16 चक्का गाड़ियां पकड़ीं, आधे घंटे में छोड़ीं! उड़न दस्ता प्रभारी दीक्षित जी की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

✍️ Reporter: Akhilish Tripathi 🗓 25 Oct 2026, 11:34 PM 👁 17
Watch on: 📘 Facebook
Share: 💬 WhatsApp 📘 Facebook 𝕏 Post

जय अंबे की चार 16 चक्का गाड़ियां पकड़ीं, आधे घंटे में छोड़ीं! उड़न दस्ता प्रभारी दीक्षित जी की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

जय अंबे की चार 16 चक्का गाड़ियां पकड़ीं, आधे घंटे में छोड़ीं! उड़न दस्ता प्रभारी दीक्षित जी की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

संवाददाता अखिलेश त्रिपाठी

रामपुर बटुरा मेगा प्रोजेक्ट में कार्यरत जय अंबे प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से जुड़ी चार 16 चक्का गाड़ियों को लेकर परिवहन नियमों और उड़न दस्ते की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि छत्तीसगढ़ पासिंग इन गाड़ियों के पास मध्य प्रदेश में संचालन के लिए आवश्यक नेशनल परमिट नहीं था और ये कथित तौर पर ओवरलोड होकर चल रही थीं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 25 अक्टूबर की शाम लगभग 6 से 7 बजे के बीच खुटा टोला स्थित चेक पोस्ट के उड़न दस्ता प्रभारी दीक्षित जी ने सदा ओवरब्रिज के पास इन चारों गाड़ियों को पकड़ा। हालांकि, हैरानी की बात यह बताई जा रही है कि लगभग 30 मिनट के भीतर ही गाड़ियों को छोड़ दिया गया।

₹25 हजार प्रतिमाह के कथित सौदे का आरोप

गुप्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इन गाड़ियों को लेकर प्रति वाहन या निर्धारित आधार पर 25 हजार रुपये प्रतिमाह के कथित लेन-देन की बात सामने आई है। आरोप है कि पिछले तीन महीने का भुगतान नहीं मिलने के कारण गाड़ियों को रोका गया था। बाद में कंपनी के कुछ कर्मचारियों और संबंधित अधिकारी के बीच बातचीत हुई, जिसमें कथित तौर पर 26 अक्टूबर को तीन महीने के 75 हजार रुपये देने की बात कही गई। हालांकि, इस कथित लेन-देन की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि गाड़ियों के दस्तावेज और परमिट में अनियमितताएं थीं, तो नियमानुसार कार्रवाई करने के बजाय उन्हें इतनी जल्दी क्यों छोड़ दिया गया? क्या गाड़ियों के कागजात और ओवरलोडिंग की विधिवत जांच की गई?

हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन होगा?

बिना आवश्यक परमिट और ओवरलोड वाहनों का संचालन सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों के लिए खतरा बन सकता है। यदि किसी वाहन से दुर्घटना होती है, तो किसी परिवार को जान-माल का नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे में परिवहन विभाग और उड़न दस्ते की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।

सूत्रों का दावा है कि इस मामले से संबंधित वाहन नंबर और कुछ अन्य जानकारियां उपलब्ध हैं। कथित बातचीत की रिकॉर्डिंग होने का दावा भी किया गया है। इन तथ्यों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

दीक्षित जी से जवाब मांगते सवाल

संभागीय उड़न दस्ते के प्रभारी दीक्षित जी से सवाल है कि चारों गाड़ियों को किस आधार पर छोड़ा गया? क्या उनके परमिट और ओवरलोडिंग की जांच की गई? यदि नियमों का उल्लंघन मिला था, तो कार्रवाई का विवरण सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?

मामले की निष्पक्ष जांच कर संबंधित दस्तावेजों, वाहन नंबरों और कथित लेन-देन के आरोपों का सत्यापन किया जाना चाहिए। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, संबंधित अधिकारी और कंपनी का पक्ष सामने आना भी जरूरी है।
📲Get App