📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Bamahane photographer
राजनीति
जावेद राणा ने जम्मू-कश्मीर में वन अधिकार अधिनियम के त्वरित एवं पारदर्शी कार्यान्वयन की मांग की
✍️ Kashmir Life
🗓 24 अक्टू. 2026, 01:31 AM
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सक्रिय जावेद राणा ने जम्मू-कश्मीर में वन अधिकार अधिनियम के त्वरित और पारदर्शी कार्यान्वयन की मांग की।
वन अधिकार अधिनियम, जो वन‑निर्भर समुदायों के अधिकारों को मान्यता देने वाला प्रमुख कानून है, भारत के कई हिस्सों में अभी भी पूरी तरह से लागू नहीं हुआ है। जम्मू‑कश्मीर में इस अधिनियम का पूर्ण लाभ अभी तक नहीं मिल पाया है, जिससे स्थानीय हितधारकों में चिंता बढ़ी है।
जावेद राणा, जो वन‑आधारित जनसमुदायों के लिए सक्रिय वकील हैं, ने राज्य प्रशासन से इस अधिनियम के कार्यान्वयन को तेज करने और प्रक्रिया को पारदर्शी व उत्तरदायी बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि देरी और अस्पष्टता उन जनजातीय और स्वदेशी समूहों की आजीविका को नुकसान पहुंचाती है, जो वन संसाधनों पर निर्भर हैं।
राणा का यह आह्वान उस समय आया है जब क्षेत्र विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने सरकारी अधिकारियों से भूमि‑रिकॉर्ड प्रक्रियाओं को सरल बनाने, निर्णय‑निर्धारण में समुदाय के प्रतिनिधियों को शामिल करने और नियमित रूप से प्रगति रिपोर्ट प्रकाशित करने का आग्रह किया।
यदि प्रशासन इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देता है, तो तेज़ कार्यान्वयन से वन संरक्षण को मजबूती मिलेगी, हाशिए पर रहने वाले समुदायों की सामाजिक‑आर्थिक स्थिति सुधरेगी और अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण स्थापित होगा।
जावेद राणा, जो वन‑आधारित जनसमुदायों के लिए सक्रिय वकील हैं, ने राज्य प्रशासन से इस अधिनियम के कार्यान्वयन को तेज करने और प्रक्रिया को पारदर्शी व उत्तरदायी बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि देरी और अस्पष्टता उन जनजातीय और स्वदेशी समूहों की आजीविका को नुकसान पहुंचाती है, जो वन संसाधनों पर निर्भर हैं।
राणा का यह आह्वान उस समय आया है जब क्षेत्र विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने सरकारी अधिकारियों से भूमि‑रिकॉर्ड प्रक्रियाओं को सरल बनाने, निर्णय‑निर्धारण में समुदाय के प्रतिनिधियों को शामिल करने और नियमित रूप से प्रगति रिपोर्ट प्रकाशित करने का आग्रह किया।
यदि प्रशासन इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देता है, तो तेज़ कार्यान्वयन से वन संरक्षण को मजबूती मिलेगी, हाशिए पर रहने वाले समुदायों की सामाजिक‑आर्थिक स्थिति सुधरेगी और अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण स्थापित होगा।