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10 Oct 2026•
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Agriculture

जैविक खेती और पशुपालन से हीरालाल कुशवाहा ने बदली तकदीर, बीना के किसान ने की मिसाल कायम

✍️ Reporter: Pranav Gaur 🗓 10 Oct 2026, 09:20 PM 👁 8
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बीना विकासखंड के ग्राम गुलौआ के प्रगतिशील किसान हीरालाल कुशवाहा ने नवाचार और जैविक खेती को अपनाकर अपनी आय में वृद्धि की है। वे अब प्रतिदिन लगभग 40 किलोग्राम जैविक सब्जियां बेच रहे हैं।

सेवा संकल्प अभियान 2026 के तहत 'कहानी सेवा की' श्रृंखला में बीना विकासखंड के ग्राम गुलौआ के प्रगतिशील किसान श्री हीरालाल कुशवाहा ने पारंपरिक खेती के साथ सब्जी उत्पादन, दुग्ध उत्पादन और कृषि नवाचार को अपनाकर खेती को एक लाभकारी व्यवसाय बनाया है।

श्री कुशवाहा पिछले दो वर्षों से लगभग एक एकड़ भूमि में बैंगन, भिंडी, टमाटर, ककड़ी, करेला सहित अन्य सब्जियों की जैविक एवं प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। शुरुआत में उत्पादन कम होने के बावजूद, प्राकृतिक खेती की पद्धति धीरे-धीरे सफल होती गई और अब उन्हें अच्छा उत्पादन प्राप्त हो रहा है। वर्तमान में वे प्रतिदिन लगभग 40 किलोग्राम जैविक सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं, जिनकी मांग आसपास के जागरूक उपभोक्ताओं में है। इसके अतिरिक्त, वे प्रत्येक रविवार को कृषि विभाग द्वारा बीना में आयोजित जैविक हाट बाजार में अपनी उपज विक्रय के लिए भेजते हैं।

श्री कुशवाहा के पास पांच पशु हैं, जिनके गोबर का उपयोग वे खेतों में जैविक खाद के रूप में करते हैं। इससे न केवल खेती की लागत कम करने में मदद मिल रही है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ रही है। कृषि विभाग द्वारा उनके खेत की मिट्टी की जांच कर सॉइल हेल्थ कार्ड प्रदान किया गया, जिसमें मिट्टी की कमियों और आवश्यक पोषक तत्वों की जानकारी दी गई, ताकि वे भूमि की उर्वरता एवं उत्पादन क्षमता को बेहतर बना सकें।

वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्री अवधेश राय ने श्री कुशवाहा को लगातार प्रोत्साहित किया। कृषि विभाग की ओर से मसूर एवं गेहूं के बीज अनुदान पर उपलब्ध कराए गए, जिससे उन्हें खेती में अतिरिक्त लाभ मिला। श्री हीरालाल कुशवाहा का अनुभव दर्शाता है कि जैविक एवं प्राकृतिक खेती, पशुपालन और कृषि विभाग के मार्गदर्शन को अपनाकर किसान अपनी आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा सकते हैं।
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