📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Arvind Iyer from Mumbai, India
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जम्मू-कश्मीर ने 2035 तक 11,000 मेगावॉट जलविद्युत क्षमता का लक्ष्य निर्धारित किया
✍️ Daily Excelsior
🗓 28 अग. 2026, 10:34 PM
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जम्मू-कश्मीर सरकार ने 2035 तक 11,000 मेगावॉट जलविद्युत क्षमता विकसित करने की योजना का खुलासा किया, जिससे नवीकरणीय ऊर्जा बढ़ेगी और बिजली की कमी कम होगी।
जम्मू‑कश्मीर सरकार ने 2035 तक 11,000 मेगावॉट जलविद्युत क्षमता स्थापित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य घोषित किया है। यह योजना हालिया आधिकारिक बयान में राज्य की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति के हिस्से के रूप में प्रस्तुत की गई।
इस लक्ष्य को पूरा करने से नवीकरणीय ऊर्जा का हिस्सा काफी बढ़ेगा और आयातित कोयला व डीजल‑आधारित बिजली संयंत्रों पर निर्भरता घटेगी। अतिरिक्त जलविद्युत उत्पादन से लगातार चलती बिजली की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी, जो औद्योगिक विकास और घरों की खपत दोनों के लिए आवश्यक है।
सरकार हिमालयी नदियों में कई संभावित स्थल पहचान कर, रन‑ऑफ़‑द‑रिवर और जलाशय‑आधारित दोनों प्रकार के प्रोजेक्ट विकसित करने की योजना बना रही है। वित्तीय संसाधन राज्य बजट, केंद्र सरकार की योजनाओं और सार्वजनिक‑निजी साझेदारी (PPP) के माध्यम से निजी निवेशकों से जुटाए जाएंगे।
भू‑भौगोलिक कठिनाइयाँ, पर्यावरणीय मंजूरी और मौसमी जल प्रवाह में उतार‑चढ़ाव जैसी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए, अधिकारियों ने कहा है कि विस्तृत व्यवहार्यता अध्ययन और आधुनिक टरबाइन तकनीक जोखिमों को कम कर सतत संचालन सुनिश्चित करेगी।
इस लक्ष्य को पूरा करने से नवीकरणीय ऊर्जा का हिस्सा काफी बढ़ेगा और आयातित कोयला व डीजल‑आधारित बिजली संयंत्रों पर निर्भरता घटेगी। अतिरिक्त जलविद्युत उत्पादन से लगातार चलती बिजली की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी, जो औद्योगिक विकास और घरों की खपत दोनों के लिए आवश्यक है।
सरकार हिमालयी नदियों में कई संभावित स्थल पहचान कर, रन‑ऑफ़‑द‑रिवर और जलाशय‑आधारित दोनों प्रकार के प्रोजेक्ट विकसित करने की योजना बना रही है। वित्तीय संसाधन राज्य बजट, केंद्र सरकार की योजनाओं और सार्वजनिक‑निजी साझेदारी (PPP) के माध्यम से निजी निवेशकों से जुटाए जाएंगे।
भू‑भौगोलिक कठिनाइयाँ, पर्यावरणीय मंजूरी और मौसमी जल प्रवाह में उतार‑चढ़ाव जैसी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए, अधिकारियों ने कहा है कि विस्तृत व्यवहार्यता अध्ययन और आधुनिक टरबाइन तकनीक जोखिमों को कम कर सतत संचालन सुनिश्चित करेगी।