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जीएसटी परिषद: 75% बहुमत से निर्णय, 33 सदस्य, केंद्रीय एवं राज्य समन्वय
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भारत की वस्तु एवं सेवा कर परिषद ने 75% बहुमत से निर्णय लेने की प्रक्रिया अपनाई है, जिसमें केंद्रीय वित्त मंत्री अध्यक्ष और 33 सदस्य शामिल हैं।
भारत की वस्तु एवं सेवा कर परिषद, जिसे जीएसटी परिषद भी कहा जाता है, संविधान के अनुच्छेद 279A के तहत स्थापित एक संवैधानिक निकाय है। इस परिषद का अध्यक्ष केंद्रीय वित्त मंत्री है, वर्तमान में निर्मला सीतारमण।
परिषद के सदस्य केंद्रीय राजस्व मंत्री, सभी राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त या कराधान मंत्री हैं, और कुल 33 सदस्य इस निकाय का गठन करते हैं।
परिषद का मुख्य कार्य जीएसटी दरों, छूट और कर स्लैब का निर्धारण करना, वस्तुओं और सेवाओं पर कर कानूनों से संबंधित सिफारिशें देना तथा केंद्र और राज्यों के बीच कर संबंधी मामलों में एकरूपता और समन्वय स्थापित करना है।
निर्णय लेने की प्रक्रिया में, उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के तीन-चौथाई (75%) बहुमत से निर्णय लिया जाता है। इस दौरान केंद्र सरकार के वोट का भार एक तिहाई और सभी राज्यों के कुल वोटों का भार दो तिहाई होता है।
इस संरचना और निर्णय लेने के तरीके से जीएसटी परिषद कर नीति में समन्वय और एकरूपता सुनिश्चित करती है, जिससे कर प्रणाली का सुचारु संचालन संभव होता है।
परिषद के सदस्य केंद्रीय राजस्व मंत्री, सभी राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त या कराधान मंत्री हैं, और कुल 33 सदस्य इस निकाय का गठन करते हैं।
परिषद का मुख्य कार्य जीएसटी दरों, छूट और कर स्लैब का निर्धारण करना, वस्तुओं और सेवाओं पर कर कानूनों से संबंधित सिफारिशें देना तथा केंद्र और राज्यों के बीच कर संबंधी मामलों में एकरूपता और समन्वय स्थापित करना है।
निर्णय लेने की प्रक्रिया में, उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के तीन-चौथाई (75%) बहुमत से निर्णय लिया जाता है। इस दौरान केंद्र सरकार के वोट का भार एक तिहाई और सभी राज्यों के कुल वोटों का भार दो तिहाई होता है।
इस संरचना और निर्णय लेने के तरीके से जीएसटी परिषद कर नीति में समन्वय और एकरूपता सुनिश्चित करती है, जिससे कर प्रणाली का सुचारु संचालन संभव होता है।