📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Yashvardhan vaze
विज्ञान
नर्मदापुरम जेल में बंदी ने बनायीं 8 रुपये की रेडियम रिफ्लेक्टर बेल्ट, बचाएंगे बेजुबान जानवर
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 08 अक्टू. 2026, 05:16 PM
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नर्मदापुरम सेंट्रल जेल के बंदी पुराने कंबल व कपड़े से 8 रुपये की रेडियम रिफ्लेक्टर बेल्ट बनाकर रात में वाहन चालकों को पशु पहचानने में मदद कर रहे हैं।
नर्मदापुरम सेंट्रल जेल के बंदी ने पुराने कंबल, कपड़े व अन्य बेकार सामग्री को रेडियम रिफ्लेक्टर बेल्ट में बदलना शुरू कर दिया है। प्रत्येक बेल्ट की लागत लगभग आठ रुपये है, फिर भी यह रात में वाहन चालकों को बेजुबान पशुओं को स्पष्ट रूप से दिखाने में मदद करती है।
यह पहल सड़क पर घूमते पशुओं और कुत्तों से होने वाले दुर्घटनाओं को कम करने के उद्देश्य से शुरू की गई है। बेल्ट की चमकदार सतह वाहन की हेडलाइट को प्रतिबिंबित करती है, जिससे पशु दूर से ही उज्ज्वल रूप में दिखाई देता है और चालक को समय पर ब्रेक लगाने का अवसर मिलता है।
जेल प्रशासन ने इस परियोजना को जारी रखने की अनुमति दी है, क्योंकि यह सामाजिक प्रभाव के साथ साथ कैदियों को नई कौशल प्रदान करती है। इन बेल्टों को मध्य प्रदेश के आसपास के जिलों में स्थानीय परिवहन संघों और स्वयंसेवी समूहों को वितरित किया जा रहा है।
यदि यह कम लागत वाला समाधान व्यापक रूप से अपनाया जाता है, तो यह मौजूदा सड़क सुरक्षा उपायों को पूरक कर सकता है और कैदियों के पुनर्वास में सामुदायिक‑उन्मुख नवाचार का नया मार्ग खोल सकता है।
यह पहल सड़क पर घूमते पशुओं और कुत्तों से होने वाले दुर्घटनाओं को कम करने के उद्देश्य से शुरू की गई है। बेल्ट की चमकदार सतह वाहन की हेडलाइट को प्रतिबिंबित करती है, जिससे पशु दूर से ही उज्ज्वल रूप में दिखाई देता है और चालक को समय पर ब्रेक लगाने का अवसर मिलता है।
जेल प्रशासन ने इस परियोजना को जारी रखने की अनुमति दी है, क्योंकि यह सामाजिक प्रभाव के साथ साथ कैदियों को नई कौशल प्रदान करती है। इन बेल्टों को मध्य प्रदेश के आसपास के जिलों में स्थानीय परिवहन संघों और स्वयंसेवी समूहों को वितरित किया जा रहा है।
यदि यह कम लागत वाला समाधान व्यापक रूप से अपनाया जाता है, तो यह मौजूदा सड़क सुरक्षा उपायों को पूरक कर सकता है और कैदियों के पुनर्वास में सामुदायिक‑उन्मुख नवाचार का नया मार्ग खोल सकता है।