📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Mennonite Church USA Archives
बिज़नेस
इंदौर के व्यापारियों ने प्रस्तावित यूपीआई शुल्क विरोध में 'नो यूपीआई डे' मनाया
✍️ Amar Ujala · Indore
🗓 23 सित. 2026, 03:16 PM
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इंदौर के व्यापारियों ने क्यूआर कोड पर काला कपड़ा रखकर नकद भुगतान की अपील की, क्योंकि प्रस्तावित यूपीआई मर्चेंट शुल्क ₹2,000 से अधिक है।
इंदौर के कई बाजारों, विशेषकर राजबाड़ा में, व्यापारियों ने "नो यूपीआई डे" के नाम पर एकजुट होकर प्रस्तावित यूपीआई मर्चेंट शुल्क के विरोध में प्रदर्शन किया। इस शुल्क को ₹2,000 से अधिक होने का अनुमान है, जिससे छोटे व्यापारियों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका है।
व्यापारियों ने अपने काउंटर पर लगे QR कोड को काले कपड़े से ढक दिया, जिससे डिजिटल भुगतान अस्थायी रूप से बंद हो गया। साथ ही उन्होंने ग्राहकों से नकद भुगतान करने की अपील की, ताकि शुल्क के प्रभाव को महसूस न करना पड़े।
यह कदम डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के साथ-साथ छोटे उद्यमियों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखने की आवश्यकता को उजागर करता है। सरकार और भुगतान नेटवर्क की अभी तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं मिलने के कारण व्यापारियों ने कहा कि यदि उनकी बात नहीं सुनी गई तो वे आगे भी विरोध जारी रखेंगे।
स्थानीय प्राधिकारियों ने इस प्रदर्शन को शांति से निगरानी में रखा, कोई हिंसा या सार्वजनिक व्यवस्था में बाधा नहीं आई।
यह घटना भारत में डिजिटल लेनदेन के विस्तार और छोटे व्यापारियों के हितों के बीच संतुलन बनाने के व्यापक राष्ट्रीय चर्चा में एक नया आयाम जोड़ती है।
व्यापारियों ने अपने काउंटर पर लगे QR कोड को काले कपड़े से ढक दिया, जिससे डिजिटल भुगतान अस्थायी रूप से बंद हो गया। साथ ही उन्होंने ग्राहकों से नकद भुगतान करने की अपील की, ताकि शुल्क के प्रभाव को महसूस न करना पड़े।
यह कदम डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के साथ-साथ छोटे उद्यमियों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखने की आवश्यकता को उजागर करता है। सरकार और भुगतान नेटवर्क की अभी तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं मिलने के कारण व्यापारियों ने कहा कि यदि उनकी बात नहीं सुनी गई तो वे आगे भी विरोध जारी रखेंगे।
स्थानीय प्राधिकारियों ने इस प्रदर्शन को शांति से निगरानी में रखा, कोई हिंसा या सार्वजनिक व्यवस्था में बाधा नहीं आई।
यह घटना भारत में डिजिटल लेनदेन के विस्तार और छोटे व्यापारियों के हितों के बीच संतुलन बनाने के व्यापक राष्ट्रीय चर्चा में एक नया आयाम जोड़ती है।