📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prime Minister's Office
स्थानीय
इंदौर के महापौर ने पानी की बर्बादी पर 2000 रुपये का जुर्माना लगाया
✍️ Amar Ujala · Indore
🗓 27 अक्टू. 2026, 07:46 PM
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इंदौर में महापौर ने पानी की बर्बादी पर 2000 रुपये का स्पॉट जुर्माना लगाया, जिससे शहर की जल संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता स्पष्ट हुई।
इंदौर नगर निगम ने गुरुवार को पानी की बर्बादी पर ₹2,000 का स्पॉट जुर्माना लगाने की घोषणा की, ताकि बढ़ती जल की कमी के बीच अनावश्यक खपत को रोका जा सके। यह जुर्माना किसी भी व्यक्ति या व्यवसाय पर लागू होता है जो शहर के जल संरक्षण नियमों का उल्लंघन करता है, जैसा कि नवीनतम नगरपालिका अध्यादेश में उल्लिखित है।
अधिकारियों ने कहा कि यह कदम जिम्मेदार जल उपयोग को बढ़ावा देने वाली व्यापक पहल का हिस्सा है, जिसमें सार्वजनिक जागरूकता अभियान और जल मीटरों की कड़ी निगरानी शामिल है। जुर्माने का उद्देश्य एक निवारक के रूप में कार्य करना है, जिससे निवासियों और व्यवसायों को अधिक कुशल प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रेरित किया जा सके।
महापौर ने घोषणा से पहले एक संक्षिप्त संबोधन में जोर दिया कि हर बूंद महत्वपूर्ण है और शहर के संसाधनों को भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना आवश्यक है। जुर्माना नगर निगम के कार्यालयों में वसूला जाएगा और राशि जल अवसंरचना परियोजनाओं के लिए earmarked की जाएगी।
जुर्माने के अलावा, शहर लीकेज की मरम्मत और वर्षा जल संचयन प्रणालियों का विस्तार जैसी अन्य परियोजनाओं पर भी काम कर रहा है, ताकि उपचारित पानी पर निर्भरता कम की जा सके।
अधिकारियों ने कहा कि यह कदम जिम्मेदार जल उपयोग को बढ़ावा देने वाली व्यापक पहल का हिस्सा है, जिसमें सार्वजनिक जागरूकता अभियान और जल मीटरों की कड़ी निगरानी शामिल है। जुर्माने का उद्देश्य एक निवारक के रूप में कार्य करना है, जिससे निवासियों और व्यवसायों को अधिक कुशल प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रेरित किया जा सके।
महापौर ने घोषणा से पहले एक संक्षिप्त संबोधन में जोर दिया कि हर बूंद महत्वपूर्ण है और शहर के संसाधनों को भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना आवश्यक है। जुर्माना नगर निगम के कार्यालयों में वसूला जाएगा और राशि जल अवसंरचना परियोजनाओं के लिए earmarked की जाएगी।
जुर्माने के अलावा, शहर लीकेज की मरम्मत और वर्षा जल संचयन प्रणालियों का विस्तार जैसी अन्य परियोजनाओं पर भी काम कर रहा है, ताकि उपचारित पानी पर निर्भरता कम की जा सके।