📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Gyanendra_Singh_Chau…
अपराध
इंदौर हाईकोर्ट ने आदिवासी प्रदर्शन में शामिल छात्र के खिलाफ एफआईआर और चार्जशीट को रद्द किया
✍️ Amar Ujala · Indore
🗓 04 नव. 2026, 10:01 AM
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के इंदौर पीठ ने आदिवासी युवाओं के प्रदर्शन में शामिल छात्र के खिलाफ दर्ज एफआईआर और चार्जशीट को रद्द कर दिया, क्योंकि लोक सेवक की लिखित शिकायत नहीं मिली थी।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने आदिवासी युवाओं के प्रदर्शन में शामिल एक छात्र के खिलाफ दर्ज एफआईआर और चार्जशीट को रद्द करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि बीएनएस अधिनियम की धारा 223 के तहत कार्रवाई तभी की जा सकती है जब संबंधित लोक सेवक की लिखित शिकायत मौजूद हो, जो इस मामले में नहीं थी।
यह एफआईआर छात्र की भागीदारी के बाद दर्ज की गई थी, जब कई आदिवासी युवा अपने अधिकारों की मांग कर रहे थे। छात्र को एक मेधावी के रूप में पहचाना गया था और उसके खिलाफ आपराधिक प्रक्रिया शुरू की गई थी, जिसे बाद में हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।
न्यायालय ने प्रक्रिया की वैधता पर बल दिया और कहा कि लिखित शिकायत की अनुपस्थिति में पहले की कार्यवाही अमान्य है, इसलिए मामला खारिज किया गया।
कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि यह निर्णय प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आपराधिक प्रावधान लागू करने से पहले विधायी आवश्यकताओं का पालन करने के महत्व को रेखांकित करता है। यह आदेश छात्र को राहत प्रदान करता है और समान मामलों में पूर्वनिर्धारित मानक स्थापित करता है।
यह एफआईआर छात्र की भागीदारी के बाद दर्ज की गई थी, जब कई आदिवासी युवा अपने अधिकारों की मांग कर रहे थे। छात्र को एक मेधावी के रूप में पहचाना गया था और उसके खिलाफ आपराधिक प्रक्रिया शुरू की गई थी, जिसे बाद में हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।
न्यायालय ने प्रक्रिया की वैधता पर बल दिया और कहा कि लिखित शिकायत की अनुपस्थिति में पहले की कार्यवाही अमान्य है, इसलिए मामला खारिज किया गया।
कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि यह निर्णय प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आपराधिक प्रावधान लागू करने से पहले विधायी आवश्यकताओं का पालन करने के महत्व को रेखांकित करता है। यह आदेश छात्र को राहत प्रदान करता है और समान मामलों में पूर्वनिर्धारित मानक स्थापित करता है।