📷 चित्र स्रोत: Flickr (CC)
वायरल
भारत की प्रमुख भ्रष्टाचार विरोधी साइट Bribes.fyi अचानक बंद
✍️ NDTV
🗓 19 अग. 2026, 07:39 AM
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वायरल भ्रष्टाचार विरोधी पोर्टल Bribes.fyi एक रात में इंटरनेट से गायब हो गया, जिससे तकनीकी खराबी या बाहरी दबाव के अटकलें लग रही हैं।
भ्रष्टाचार विरोधी वेबसाइट Bribes.fyi, जिसने घोटालों के आरोपों को उजागर कर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा बटोरी, सोमवार की सुबह से ही इंटरनेट पर उपलब्ध नहीं रही। साइट तक पहुँचने की कोशिश करने वाले उपयोगकर्ताओं को सर्वर त्रुटि का संदेश मिला और डोमेन अपने सामान्य पृष्ठों पर नहीं खुल रहा है।
साइट के प्रबंधकों ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, और उनके सोशल मीडिया खातों पर भी कोई अपडेट नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यवधान तकनीकी गड़बड़ी, होस्टिंग प्रदाता द्वारा जानबूझकर बंदी, या भ्रष्टाचार संबंधी जानकारी के प्रकाशन को लेकर सरकारी दबाव के कारण हो सकता है।
पिछले वर्ष Bribes.fyi ने करोड़ों विज़िटर आकर्षित किए और कई मीडिया संस्थाओं ने इसके द्वारा एकत्रित आरोपों को उद्धृत किया। इस अचानक बंद होने से भारत में व्हिसलब्लोअर प्लेटफ़ॉर्म की सुरक्षा और उनके लिए उपलब्ध कानूनी संरक्षण पर नई बहस छिड़ गई है।
क़ानूनी विशेषज्ञ बताते हैं कि सूचना का अधिकार अधिनियम पारदर्शिता को बढ़ावा देता है, पर ऑनलाइन भ्रष्टाचार निगरानी साइटों के लिए स्पष्ट नियामक ढांचा नहीं है, जिससे वे तेज़ी से बंदी का शिकार हो सकती हैं। यह घटना डिजिटल निगरानी समूहों को जटिल नियामक माहौल में जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, उसे उजागर करती है।
साइट के प्रबंधकों ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, और उनके सोशल मीडिया खातों पर भी कोई अपडेट नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यवधान तकनीकी गड़बड़ी, होस्टिंग प्रदाता द्वारा जानबूझकर बंदी, या भ्रष्टाचार संबंधी जानकारी के प्रकाशन को लेकर सरकारी दबाव के कारण हो सकता है।
पिछले वर्ष Bribes.fyi ने करोड़ों विज़िटर आकर्षित किए और कई मीडिया संस्थाओं ने इसके द्वारा एकत्रित आरोपों को उद्धृत किया। इस अचानक बंद होने से भारत में व्हिसलब्लोअर प्लेटफ़ॉर्म की सुरक्षा और उनके लिए उपलब्ध कानूनी संरक्षण पर नई बहस छिड़ गई है।
क़ानूनी विशेषज्ञ बताते हैं कि सूचना का अधिकार अधिनियम पारदर्शिता को बढ़ावा देता है, पर ऑनलाइन भ्रष्टाचार निगरानी साइटों के लिए स्पष्ट नियामक ढांचा नहीं है, जिससे वे तेज़ी से बंदी का शिकार हो सकती हैं। यह घटना डिजिटल निगरानी समूहों को जटिल नियामक माहौल में जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, उसे उजागर करती है।