📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / NASA and the European Space Agency.
बिज़नेस
इरान युद्ध के शॉक के बावजूद भारत का Q1 जीडीपी 7.3% पर
✍️ The Economic Times
🗓 17 अग. 2026, 08:01 AM
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इकनॉमिक टाइम्स के सर्वे के अनुसार, इरान युद्ध के शॉक के बावजूद भारत का पहली तिमाही जीडीपी 7.3% वर्ष-दर-वर्ष बढ़ने का अनुमान है, जो उपभोग और पूंजीगत व्यय के स्थिर रहने से संभव हुआ है।
इकनॉमिक टाइम्स द्वारा किए गए हालिया सर्वेक्षण के अनुसार, भारत का सकल घरेलू उत्पाद पहली तिमाही में 7.3% बढ़ने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के इसी अवधि के 7.2% से ऊपर है। यह अनुमान घरेलू उपभोग और निवेश खर्च में स्थिरता को दर्शाता है, जो वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद बना हुआ है।
विश्लेषकों का कहना है कि खुदरा बिक्री, आवास निर्माण और विनिर्माण उत्पादन में मजबूती इस विकास पूर्वानुमान के प्रमुख कारण हैं। सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों की पूंजीगत व्यय को भी गति बनाए रखने की उम्मीद है, जिससे बाहरी झटकों के नकारात्मक प्रभाव को संतुलित किया जा सके।
सर्वेक्षण में इरान में चल रहे संघर्ष के आर्थिक प्रभावों को भी स्वीकार किया गया है, जिसने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित किया और ऊर्जा कीमतों में वृद्धि की। फिर भी, भारत की विविधीकृत अर्थव्यवस्था और मजबूत घरेलू मांग को इस शॉक को कम करने वाला माना गया है।
यदि यह पूर्वानुमान वास्तविकता में बदलता है, तो यह भारत को विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक के रूप में स्थापित करेगा और आने वाले महीनों में राजकोषीय प्रोत्साहन और मौद्रिक ढील के निर्णयों को प्रभावित कर सकता है।
विश्लेषकों का कहना है कि खुदरा बिक्री, आवास निर्माण और विनिर्माण उत्पादन में मजबूती इस विकास पूर्वानुमान के प्रमुख कारण हैं। सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों की पूंजीगत व्यय को भी गति बनाए रखने की उम्मीद है, जिससे बाहरी झटकों के नकारात्मक प्रभाव को संतुलित किया जा सके।
सर्वेक्षण में इरान में चल रहे संघर्ष के आर्थिक प्रभावों को भी स्वीकार किया गया है, जिसने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित किया और ऊर्जा कीमतों में वृद्धि की। फिर भी, भारत की विविधीकृत अर्थव्यवस्था और मजबूत घरेलू मांग को इस शॉक को कम करने वाला माना गया है।
यदि यह पूर्वानुमान वास्तविकता में बदलता है, तो यह भारत को विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक के रूप में स्थापित करेगा और आने वाले महीनों में राजकोषीय प्रोत्साहन और मौद्रिक ढील के निर्णयों को प्रभावित कर सकता है।