📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Communications
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भारत सरकार ने मार्च‑जुलाई में सोशल मीडिया कंपनियों को 200,000 से अधिक ब्लॉकिंग आदेश जारी किए
✍️ indianexpress.com
🗓 18 अग. 2026, 05:48 AM
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मार्च से जुलाई तक, भारतीय सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों को हर मिनट एक ब्लॉकिंग आदेश भेजा, जिससे नियामक प्रवर्तन में वृद्धि स्पष्ट होती है।
मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फ़ॉर्मेशन टेक्नोलॉजी ने मार्च से जुलाई तक सोशल मीडिया कंपनियों को हर मिनट एक ब्लॉकिंग आदेश जारी किया है। ये आदेश सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत जारी किए गए हैं और उन सामग्री को लक्षित करते हैं जिन्हें सरकार हानिकारक या अवैध मानती है। इस आदेशों की उच्च आवृत्ति डिजिटल सामग्री नियमन में कड़ी कार्रवाई को दर्शाती है।
इन निर्देशों के तहत प्लेटफ़ॉर्मों को निर्दिष्ट सामग्री को हटाने या पहुँच बंद करने के लिए एक संक्षिप्त समयसीमा के भीतर कार्य करना होता है। सरकार ने सार्वजनिक व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए इस तेज़ी से आदेश जारी करने का कारण बताया है। हालांकि, अधिकारियों ने प्रभावित सामग्री श्रेणियों का विस्तृत विवरण अभी तक जारी नहीं किया है।
इस कदम पर नागरिक समाज समूहों और डिजिटल अधिकार समर्थकों ने ध्यान दिया है, जो तर्क देते हैं कि इतनी बड़ी संख्या में आदेश अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर असर डाल सकते हैं। प्लेटफ़ॉर्म ऑपरेटरों ने कानूनी आवश्यकताओं के अनुपालन की पुष्टि की है और उपयोगकर्ताओं व हितधारकों के लिए स्पष्ट दिशानिर्देशों का आग्रह किया है।
सरकार का यह दृष्टिकोण डिजिटल शासन के प्रति अधिक सक्रिय रुख को दर्शाता है, जिसमें मंत्रालय ने आदेश जारी करने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने और पारदर्शिता बढ़ाने की योजनाएँ घोषित की हैं।
इन निर्देशों के तहत प्लेटफ़ॉर्मों को निर्दिष्ट सामग्री को हटाने या पहुँच बंद करने के लिए एक संक्षिप्त समयसीमा के भीतर कार्य करना होता है। सरकार ने सार्वजनिक व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए इस तेज़ी से आदेश जारी करने का कारण बताया है। हालांकि, अधिकारियों ने प्रभावित सामग्री श्रेणियों का विस्तृत विवरण अभी तक जारी नहीं किया है।
इस कदम पर नागरिक समाज समूहों और डिजिटल अधिकार समर्थकों ने ध्यान दिया है, जो तर्क देते हैं कि इतनी बड़ी संख्या में आदेश अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर असर डाल सकते हैं। प्लेटफ़ॉर्म ऑपरेटरों ने कानूनी आवश्यकताओं के अनुपालन की पुष्टि की है और उपयोगकर्ताओं व हितधारकों के लिए स्पष्ट दिशानिर्देशों का आग्रह किया है।
सरकार का यह दृष्टिकोण डिजिटल शासन के प्रति अधिक सक्रिय रुख को दर्शाता है, जिसमें मंत्रालय ने आदेश जारी करने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने और पारदर्शिता बढ़ाने की योजनाएँ घोषित की हैं।