📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Martin F. Gomon
कृषि
चावल के बड़े आवंटन के बावजूद भारत के इथेनॉल लक्ष्य पीछे रह गए
✍️ India Today
🗓 25 अग. 2026, 12:17 AM
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विश्लेषकों का कहना है कि इथेनॉल उत्पादन के लिए भारत की गणनाएँ सही नहीं दिख रही हैं, जबकि सरकार ने बड़े पैमाने पर चावल को बायोफ्यूल के लिये आवंटित किया है। यह अंतर नीति की व्यवहारिकता पर सवाल उठाता है।
नई जानकारी से पता चलता है कि चावल के बड़े आवंटन से प्राप्त इथेनॉल की अनुमानित मात्रा सरकार के निर्धारित लक्ष्य से मेल नहीं खा रही है। जबकि खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय ने चावल को इथेनॉल कारखानों में भेजने का बड़ा कदम उठाया, चावल के टन के हिसाब से प्राप्त इथेनॉल की मात्रा में असंगति दिख रही है, जिससे उद्योग विशेषज्ञ इस गणना की सटीकता पर सवाल उठा रहे हैं।
कृषि अर्थशास्त्री बताते हैं कि चावल से इथेनॉल में रूपांतरण की दक्षता अनाज की गुणवत्ता और प्रसंस्करण तकनीक पर निर्भर करती है। स्पष्ट मानकों के बिना, चावल के आवंटन से इथेनॉल में योगदान का आंकड़ा अधिक दिखाया जा सकता है।
यह अंतर नीति निर्माताओं में इस बात पर बहस को जन्म दे रहा है कि खाद्य अनाज को ईंधन के रूप में उपयोग करना कितना टिकाऊ है। आलोचक कहते हैं कि इससे खाद्य आपूर्ति पर दबाव पड़ सकता है, जबकि समर्थक तर्क देते हैं कि यह किसानों की आय और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देता है। अभी तक सरकार ने इन आंकड़ों का विस्तृत मिलान नहीं किया है।
इथेनॉल निर्माताओं और किसान संगठनों सहित कई हितधारक एक स्पष्ट ढाँचा चाहते हैं जो कृषि उत्पादन और बायोफ्यूल लक्ष्यों को संतुलित करे, ताकि खाद्य सुरक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा दोनों सुनिश्चित हो सकें।
जब तक विस्तृत ऑडिट प्रकाशित नहीं होता, अनुमानित और वास्तविक इथेनॉल उत्पादन के बीच का अंतर एक प्रमुख मुद्दा बना रहेगा, जिससे भारत की बायोफ्यूल रणनीति में अधिक कड़ी डेटा जांच की आवश्यकता स्पष्ट होती है।
कृषि अर्थशास्त्री बताते हैं कि चावल से इथेनॉल में रूपांतरण की दक्षता अनाज की गुणवत्ता और प्रसंस्करण तकनीक पर निर्भर करती है। स्पष्ट मानकों के बिना, चावल के आवंटन से इथेनॉल में योगदान का आंकड़ा अधिक दिखाया जा सकता है।
यह अंतर नीति निर्माताओं में इस बात पर बहस को जन्म दे रहा है कि खाद्य अनाज को ईंधन के रूप में उपयोग करना कितना टिकाऊ है। आलोचक कहते हैं कि इससे खाद्य आपूर्ति पर दबाव पड़ सकता है, जबकि समर्थक तर्क देते हैं कि यह किसानों की आय और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देता है। अभी तक सरकार ने इन आंकड़ों का विस्तृत मिलान नहीं किया है।
इथेनॉल निर्माताओं और किसान संगठनों सहित कई हितधारक एक स्पष्ट ढाँचा चाहते हैं जो कृषि उत्पादन और बायोफ्यूल लक्ष्यों को संतुलित करे, ताकि खाद्य सुरक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा दोनों सुनिश्चित हो सकें।
जब तक विस्तृत ऑडिट प्रकाशित नहीं होता, अनुमानित और वास्तविक इथेनॉल उत्पादन के बीच का अंतर एक प्रमुख मुद्दा बना रहेगा, जिससे भारत की बायोफ्यूल रणनीति में अधिक कड़ी डेटा जांच की आवश्यकता स्पष्ट होती है।