📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Chris Woodrich
विदेश
भारत के राजदूत ने कनाडा को खालिस्तान समर्थन पर चेतावनी दी
✍️ Firstpost
🗓 12 अक्टू. 2026, 07:37 AM
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भारत के राजदूत ने “डॉन्ट ब्रिंग द फिल्थ, टेरर” कहकर कनाडा को खालिस्तान उग्रवादियों को समर्थन न देने की चेतावनी दी।
नई दिल्ली के वरिष्ठ राजदूत ने कनाडा सरकार को खालिस्तान अलगाववादी गतिविधियों को मंच न देने की कड़ी चेतावनी दी। उग्रवादियों के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, “डॉन्ट ब्रिंग द फिल्थ, टेरर,” और इस तरह के समर्थन से द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान पहुँच सकता है।
यह बयान ओटावा में एक प्रेस ब्रीफ़िंग के दौरान दिया गया, जहाँ राजदूत ने सिख प्रवासी समुदाय में खालिस्तान समर्थक समूहों की बढ़ती उपस्थिति को उजागर किया। उन्होंने कनाडाई अधिकारियों से अनुरोध किया कि वे किसी भी ऐसे कार्य की निगरानी करें जो अलगाववादी हिंसा को प्रोत्साहित माना जा सकता है।
भारत और कनाडा के बीच पहले भी खालिस्तान मुद्दे को लेकर कूटनीतिक तनाव रहा है, जहाँ नई दिल्ली ने विदेशी धरती को भारत के खिलाफ उकसावे के लिए उपयोग करने का आरोप लगाया है। राजदूत के बयान ने भारत की यह मांग दोहराई कि कोई भी ऐसी गतिविधि जो भारत की संप्रभुता को खतरे में डालती है, उसके खिलाफ कड़ा रुख अपनाया जाए।
कनाडाई अधिकारियों ने अभी तक इस टिप्पणी पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, पर यह संवाद प्रवासी राजनीति और भारत‑कनाडा संबंधों की संवेदनशीलता को उजागर करता है।
यह बयान विदेश में संभावित खतरों का सामना करने और उग्रवादी विचारधाराओं को रोकने के लिए होस्ट देशों के सहयोग की नई दिल्ली की व्यापक रणनीति को दर्शाता है।
यह बयान ओटावा में एक प्रेस ब्रीफ़िंग के दौरान दिया गया, जहाँ राजदूत ने सिख प्रवासी समुदाय में खालिस्तान समर्थक समूहों की बढ़ती उपस्थिति को उजागर किया। उन्होंने कनाडाई अधिकारियों से अनुरोध किया कि वे किसी भी ऐसे कार्य की निगरानी करें जो अलगाववादी हिंसा को प्रोत्साहित माना जा सकता है।
भारत और कनाडा के बीच पहले भी खालिस्तान मुद्दे को लेकर कूटनीतिक तनाव रहा है, जहाँ नई दिल्ली ने विदेशी धरती को भारत के खिलाफ उकसावे के लिए उपयोग करने का आरोप लगाया है। राजदूत के बयान ने भारत की यह मांग दोहराई कि कोई भी ऐसी गतिविधि जो भारत की संप्रभुता को खतरे में डालती है, उसके खिलाफ कड़ा रुख अपनाया जाए।
कनाडाई अधिकारियों ने अभी तक इस टिप्पणी पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, पर यह संवाद प्रवासी राजनीति और भारत‑कनाडा संबंधों की संवेदनशीलता को उजागर करता है।
यह बयान विदेश में संभावित खतरों का सामना करने और उग्रवादी विचारधाराओं को रोकने के लिए होस्ट देशों के सहयोग की नई दिल्ली की व्यापक रणनीति को दर्शाता है।