📷 चित्र स्रोत: Indian Express (via NewsData)
बिज़नेस
भारत के बफ़ेलो मीट निर्यात ने 5 बिलियन डॉलर की सीमा पार की
✍️ Indian Express
🗓 19 अग. 2026, 09:45 AM
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भारत के बफ़ेलो मीट निर्यात में तेज़ी से वृद्धि हुई, अब कुल निर्यात मूल्य 5 बिलियन डॉलर तक पहुँच गया।
भारत के बफ़ेलो मीट निर्यात की आय $5 बिलियन की सीमा पार कर गई है, जो पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र के तेज़ विस्तार को दर्शाता है। वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़े दर्शाते हैं कि निर्यात में साल-दर-साल वृद्धि हुई है, जिससे भारत विश्व के प्रमुख बफ़ेलो मीट निर्यातकों में शामिल हो गया है।
इस वृद्धि का मुख्य कारण दक्षिण‑पूर्व एशिया और मध्य पूर्व के बाजारों में बफ़ेलो मीट की बढ़ती मांग है, जहाँ इसे कम लागत और कम वसा वाले मांस के रूप में सराहा जाता है। हालिया व्यापार समझौते और आसान प्रमाणन प्रक्रिया ने भारतीय निर्यातकों को कड़े आयात मानकों को पूरा करने में मदद की है।
बढ़ते निर्यात से भारतीय पशुपालकों और मांस प्रसंस्करण इकाइयों को सीधा लाभ मिल रहा है, कई कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को पूरा करने के लिए सुविधाओं का आधुनिकीकरण किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार विविधीकरण जारी रहने पर अगले वित्तीय वर्ष में आय और बढ़ सकती है।
सरकार इस विकास को बारीकी से देख रही है और सतत प्रजनन तथा ट्रेसबिलिटी को सुनिश्चित करने पर ज़ोर दे रही है, ताकि बाजार में भरोसा बना रहे। कोल्ड‑चेन बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करने वाली नीतियों से इस क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता और बढ़ेगी।
इस वृद्धि का मुख्य कारण दक्षिण‑पूर्व एशिया और मध्य पूर्व के बाजारों में बफ़ेलो मीट की बढ़ती मांग है, जहाँ इसे कम लागत और कम वसा वाले मांस के रूप में सराहा जाता है। हालिया व्यापार समझौते और आसान प्रमाणन प्रक्रिया ने भारतीय निर्यातकों को कड़े आयात मानकों को पूरा करने में मदद की है।
बढ़ते निर्यात से भारतीय पशुपालकों और मांस प्रसंस्करण इकाइयों को सीधा लाभ मिल रहा है, कई कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को पूरा करने के लिए सुविधाओं का आधुनिकीकरण किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार विविधीकरण जारी रहने पर अगले वित्तीय वर्ष में आय और बढ़ सकती है।
सरकार इस विकास को बारीकी से देख रही है और सतत प्रजनन तथा ट्रेसबिलिटी को सुनिश्चित करने पर ज़ोर दे रही है, ताकि बाजार में भरोसा बना रहे। कोल्ड‑चेन बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करने वाली नीतियों से इस क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता और बढ़ेगी।