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15 सित. 2026
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भारत का कृत्रिम सूर्य परियोजना वास्तविकता के करीब
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Chinmayee Mishra
विज्ञान

भारत का कृत्रिम सूर्य परियोजना वास्तविकता के करीब

✍️ indiatoday.in 🗓 14 सित. 2026, 11:16 PM 👁 8
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भारत की कृत्रिम सूर्य बनाने की नाभिकीय संलयन परियोजना ने एक नया मील का पत्थर हासिल किया, जिससे यह वास्तविकता के करीब पहुंच गई है।

भारत एक ऐसी वैज्ञानिक पहल को आगे बढ़ा रहा है जिसका लक्ष्य नाभिकीय संलयन के माध्यम से पृथ्वी पर सूर्य की ऊर्जा उत्पन्न करना है। इस परियोजना को अक्सर “कृत्रिम सूर्य” कहा जाता है, जिसका उद्देश्य ऐसा रिएक्टर बनाना है जो नियंत्रित संलयन प्रतिक्रियाओं को व्यावसायिक बिजली उत्पादन के लिए स्थायी रूप से चलाए।

हालिया प्रगति ने एक ठोस कदम को चिह्नित किया है, जहाँ शोधकर्ताओं ने प्लाज़्मा को बेहतर ढंग से नियंत्रित करने और रिएक्टर के घटकों को एकीकृत करने में सुधार दिखाया है, जिससे तकनीकी अनिश्चितताएँ कम हुई हैं। इन उपलब्धियों ने अनुमानित समय‑सीमा को घटाया है और यह आशा बढ़ी है कि निकट भविष्य में एक कार्यशील संलयन उपकरण का प्रदर्शन किया जा सकेगा।

सफलता मिलने पर कृत्रिम सूर्य एक स्वच्छ, लगभग असीमित बिजली स्रोत प्रदान कर सकता है, जिससे भारत के जलवायु लक्ष्यों को समर्थन मिलेगा और जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता घटेगी। सरकार और वैज्ञानिक समुदाय इस परियोजना को राष्ट्रीय ऊर्जा रणनीति का मुख्य स्तम्भ मानते हैं।

आगे का चरण प्रयोगात्मक सेट‑अप को बड़े पैमाने पर ले जाना और वास्तविक परिस्थितियों में प्रदर्शन को सत्यापित करने के लिए विस्तारित परीक्षण करना है। सभी पक्ष आशावादी हैं, लेकिन सावधानी बरतते हुए इस कार्यक्रम को प्रयोगशाला‑स्तर की उपलब्धियों से व्यावसायिक शक्ति‑उत्पादन प्रणाली की दिशा में ले जाने की प्रक्रिया को देख रहे हैं।
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