📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Commerce and Industry (India)
विदेश
भारत ने 8वीं WTO व्यापार नीति समीक्षा 21 जुलाई से शुरू करने का निर्णय लिया
✍️ Asianet Newsable
🗓 21 जुल. 2026, 06:03 AM
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भारत 21 जुलाई से विश्व व्यापार संगठन में अपनी आठवीं व्यापार नीति समीक्षा शुरू करेगा, जो देश की व्यापार नीति के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है।
भारत 21 जुलाई, 2024 को विश्व व्यापार संगठन (WTO) में अपनी आठवीं व्यापार नीति समीक्षा शुरू करने जा रहा है। यह समीक्षा WTO के सदस्य देशों के लिए अनिवार्य प्रक्रिया है, जिसके तहत भारत अपनी व्यापार नीतियों, प्रथाओं और भविष्य की योजनाओं को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने प्रस्तुत करेगा।
पहले सात समीक्षाओं के बाद, यह आगामी सत्र भारत को व्यापार साझेदारों द्वारा उठाए गए मुद्दों को संबोधित करने और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए की गई सुधारों को प्रदर्शित करने का अवसर देगा। इस सत्र में भारत अपनी व्यापार रणनीति पर भी चर्चा करेगा, जो वैश्विक आर्थिक परिवर्तनों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
व्यापार अधिकारियों ने बताया है कि समीक्षा में कृषि, विनिर्माण और डिजिटल व्यापार जैसे प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया जाएगा, जो भारत के विविधीकृत निर्यात पर बढ़ते जोर को दर्शाता है। इस प्रक्रिया में घरेलू हितधारकों और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों दोनों का ध्यान आकर्षित होने की संभावना है।
भारत का WTO समीक्षा में भाग लेना वैश्विक व्यापार मानदंडों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता और बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली में अपनी स्थिति को मजबूत करने की इच्छा को दर्शाता है।
पहले सात समीक्षाओं के बाद, यह आगामी सत्र भारत को व्यापार साझेदारों द्वारा उठाए गए मुद्दों को संबोधित करने और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए की गई सुधारों को प्रदर्शित करने का अवसर देगा। इस सत्र में भारत अपनी व्यापार रणनीति पर भी चर्चा करेगा, जो वैश्विक आर्थिक परिवर्तनों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
व्यापार अधिकारियों ने बताया है कि समीक्षा में कृषि, विनिर्माण और डिजिटल व्यापार जैसे प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया जाएगा, जो भारत के विविधीकृत निर्यात पर बढ़ते जोर को दर्शाता है। इस प्रक्रिया में घरेलू हितधारकों और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों दोनों का ध्यान आकर्षित होने की संभावना है।
भारत का WTO समीक्षा में भाग लेना वैश्विक व्यापार मानदंडों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता और बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली में अपनी स्थिति को मजबूत करने की इच्छा को दर्शाता है।