📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Railways
टेक्नोलॉजी
चीन ने ट्यूब बोरिंग मशीन निर्यात पर रोक लगाई, भारत ने अपनी खुद की ट्यूब बोरिंग मशीन बनाने का निर्णय लिया
✍️ The Economic Times
🗓 23 अक्टू. 2026, 11:36 PM
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चीन ने ट्यूब बोरिंग मशीन (TBM) के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया, जिसके जवाब में भारत ने अपनी घरेलू उत्पादन योजनाओं को तेज करने का निर्णय लिया। वाणिज्य मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस पहल को रेखांकित करते हुए एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की।
चीन के ट्यूब बोरिंग मशीन (TBM) के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के निर्णय से वैश्विक बुनियादी ढांचा योजनाकारों में चिंता बढ़ी है। इसके जवाब में, भारतीय सरकार ने घरेलू स्तर पर TBM विकसित करने और उत्पादन करने के लिए एक नया कार्यक्रम शुरू किया है।
इस पहल का उद्देश्य विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करना और देश भर में बड़े पैमाने पर टनल परियोजनाओं के निर्माण को तेज करना है। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, वाणिज्य मंत्रालय प्रमुख भारतीय इंजीनियरिंग फर्मों और शोध संस्थानों के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप मशीनों को डिजाइन करेगा।
वाणिज्य मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि यह कदम उच्च कौशल वाले नौकरियों का सृजन करेगा और घरेलू विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह परियोजना भारत के "स्वनिर्भरता" के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप है।
सरकार अगले दो वर्षों के भीतर एक समर्पित TBM विनिर्माण केंद्र स्थापित करने की योजना बना रही है, और पहला प्रोटोटाइप 2025 तक एक पायलट टनल परियोजना में परीक्षण किया जाएगा। यह पहल भारत को वैश्विक TBM बाजार में एक प्रतिस्पर्धी खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने की उम्मीद है।
उद्योग विश्लेषकों का अनुमान है कि TBM का घरेलू उत्पादन भारतीय कंपनियों के लिए नई निर्यात संभावनाएँ खोल सकता है, विशेषकर उभरती अर्थव्यवस्थाओं में जहाँ टनल निर्माण की मांग बढ़ रही है।
इस पहल का उद्देश्य विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करना और देश भर में बड़े पैमाने पर टनल परियोजनाओं के निर्माण को तेज करना है। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, वाणिज्य मंत्रालय प्रमुख भारतीय इंजीनियरिंग फर्मों और शोध संस्थानों के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप मशीनों को डिजाइन करेगा।
वाणिज्य मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि यह कदम उच्च कौशल वाले नौकरियों का सृजन करेगा और घरेलू विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह परियोजना भारत के "स्वनिर्भरता" के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप है।
सरकार अगले दो वर्षों के भीतर एक समर्पित TBM विनिर्माण केंद्र स्थापित करने की योजना बना रही है, और पहला प्रोटोटाइप 2025 तक एक पायलट टनल परियोजना में परीक्षण किया जाएगा। यह पहल भारत को वैश्विक TBM बाजार में एक प्रतिस्पर्धी खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने की उम्मीद है।
उद्योग विश्लेषकों का अनुमान है कि TBM का घरेलू उत्पादन भारतीय कंपनियों के लिए नई निर्यात संभावनाएँ खोल सकता है, विशेषकर उभरती अर्थव्यवस्थाओं में जहाँ टनल निर्माण की मांग बढ़ रही है।