📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Alexey M.
देश
2026 के ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स में भारत की रैंक 131वाँ
✍️ Telangana Today
🗓 17 सित. 2026, 06:39 AM
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वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम की 2026 ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट में भारत का स्थान 146 देशों में से 131वाँ आया, जो स्वास्थ्य, शिक्षा, आर्थिक भागीदारी और राजनीतिक सशक्तिकरण में अंतर को दर्शाता है।
वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम ने 2026 का ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स जारी किया, जिसमें भारत को 146 देशों में से 131वाँ स्थान मिला। यह रैंकिंग स्वास्थ्य, शिक्षा, आर्थिक भागीदारी और राजनीतिक सशक्तिकरण के चार प्रमुख आयामों में लैंगिक समानता के अंतर को दर्शाती है।
इंडेक्स में स्वास्थ्य‑जीवन expectancy, शैक्षिक उपलब्धि, आर्थिक भागीदारी व अवसर, और राजनीतिक सशक्तिकरण को मापने के लिए स्कोर दिया जाता है, जहाँ 1.0 पूर्ण समानता को दर्शाता है। भारत का समग्र स्कोर वैश्विक औसत से काफी नीचे है, जिससे सुधार की आवश्यकता स्पष्ट होती है।
विश्लेषकों का मानना है कि कम महिला श्रम‑शक्ति भागीदारी, चुनावी प्रतिनिधित्व में कमी, तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच में अंतर जैसे संरचनात्मक मुद्दे इस रैंकिंग को प्रभावित कर रहे हैं। नागरिक समाज और नीति निर्माताओं से उम्मीद की जा रही है कि वे इन डेटा को लक्षित उपायों के रूप में उपयोग करें।
रिपोर्ट एक तुलनात्मक दृश्य प्रदान करती है, परन्तु लैंगिक अंतर को कम करने के लिए निरंतर नीति‑ध्यान की भी मांग करती है। भविष्य में बेहतर रैंकिंग के लिए शिक्षा, कौशल विकास और कार्यस्थल नीतियों में लैंगिक‑संतुलित सुधार आवश्यक हैं।
इंडेक्स में स्वास्थ्य‑जीवन expectancy, शैक्षिक उपलब्धि, आर्थिक भागीदारी व अवसर, और राजनीतिक सशक्तिकरण को मापने के लिए स्कोर दिया जाता है, जहाँ 1.0 पूर्ण समानता को दर्शाता है। भारत का समग्र स्कोर वैश्विक औसत से काफी नीचे है, जिससे सुधार की आवश्यकता स्पष्ट होती है।
विश्लेषकों का मानना है कि कम महिला श्रम‑शक्ति भागीदारी, चुनावी प्रतिनिधित्व में कमी, तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच में अंतर जैसे संरचनात्मक मुद्दे इस रैंकिंग को प्रभावित कर रहे हैं। नागरिक समाज और नीति निर्माताओं से उम्मीद की जा रही है कि वे इन डेटा को लक्षित उपायों के रूप में उपयोग करें।
रिपोर्ट एक तुलनात्मक दृश्य प्रदान करती है, परन्तु लैंगिक अंतर को कम करने के लिए निरंतर नीति‑ध्यान की भी मांग करती है। भविष्य में बेहतर रैंकिंग के लिए शिक्षा, कौशल विकास और कार्यस्थल नीतियों में लैंगिक‑संतुलित सुधार आवश्यक हैं।