📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / azugaldia
विदेश
भारत कहता है कि वीटो के बिना नई स्थायी सदस्यता ‘सेकेंड‑क्लास’ होगी
✍️ Telangana Today
🗓 27 अक्टू. 2026, 01:02 PM
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तेलंगाना टुडे के अनुसार, भारत ने चेतावनी दी कि वीटो अधिकार के बिना यूएन सुरक्षा परिषद के नए स्थायी सदस्य द्वितीय श्रेणी के माने जाएंगे।
नई दिल्ली ने यह दोहराया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता वीटो अधिकार के बिना प्रदान करने से सदस्य वर्गीकरण की एक पदानुक्रमिक व्यवस्था बन जाएगी, जिससे नए सदस्यों को "सेकेंड‑क्लास" दर्जा दिया जाएगा। तेलंगाना टुडे में प्रकाशित इस बयान में भारत की दीर्घकालिक मांग को दर्शाया गया है, जिसमें वह सुरक्षा परिषद के व्यापक सुधार की वकालत करता है, जो प्रतिनिधित्व और कार्यक्षमता दोनों को संतुलित करे।
भारत ने लगातार कहा है कि परिषद का विस्तार अधिक विकासशील देशों को शामिल करने के लिए आवश्यक है, परन्तु वह यह भी जोर देता है कि किसी भी नए स्थायी सदस्य को वर्तमान पाँच सदस्यों के समान वीटो अधिकार होना चाहिए। बिना इस अधिकार के, नई दिल्ली का मानना है कि विस्तारित निकाय की वैधता और प्रभावशीलता कमज़ोर हो जाएगी।
यह टिप्पणी यूएन में चल रही सुरक्षा परिषद सुधार की कूटनीतिक चर्चाओं के बीच आई है, जहाँ कई देशों ने अतिरिक्त स्थायी सीटों की मांग की है। भारत की स्थिति इस बात पर प्रकाश डालती है कि वीटो अधिकार के बिना नई स्थायी सदस्यता के प्रस्ताव को भविष्य में भारत की कड़ी विरोधी प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ेगा।
सुधार के लिए सटीक समय-सारणी अभी स्पष्ट नहीं है, परन्तु नई दिल्ली का यह रुख दर्शाता है कि वीटो अधिकार के बिना किसी भी प्रस्ताव को भारत की ओर से मजबूत विरोध का सामना करना पड़ेगा।
भारत ने लगातार कहा है कि परिषद का विस्तार अधिक विकासशील देशों को शामिल करने के लिए आवश्यक है, परन्तु वह यह भी जोर देता है कि किसी भी नए स्थायी सदस्य को वर्तमान पाँच सदस्यों के समान वीटो अधिकार होना चाहिए। बिना इस अधिकार के, नई दिल्ली का मानना है कि विस्तारित निकाय की वैधता और प्रभावशीलता कमज़ोर हो जाएगी।
यह टिप्पणी यूएन में चल रही सुरक्षा परिषद सुधार की कूटनीतिक चर्चाओं के बीच आई है, जहाँ कई देशों ने अतिरिक्त स्थायी सीटों की मांग की है। भारत की स्थिति इस बात पर प्रकाश डालती है कि वीटो अधिकार के बिना नई स्थायी सदस्यता के प्रस्ताव को भविष्य में भारत की कड़ी विरोधी प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ेगा।
सुधार के लिए सटीक समय-सारणी अभी स्पष्ट नहीं है, परन्तु नई दिल्ली का यह रुख दर्शाता है कि वीटो अधिकार के बिना किसी भी प्रस्ताव को भारत की ओर से मजबूत विरोध का सामना करना पड़ेगा।