📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of External Affairs
विदेश
भारत ने ओआईसी प्रस्तावों में जम्मू-कश्मीर का उल्लेख अस्वीकार किया
✍️ Kashmir Life
🗓 20 अक्टू. 2026, 02:37 PM
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नई दिल्ली ने ओआईसी के हालिया प्रस्तावों में जम्मू‑कश्मीर के उल्लेख को अस्वीकार किया, कहा यह भारत की संप्रभुता को नुकसान पहुंचाता है।
नई दिल्ली के विदेश मंत्रालय ने संगठन इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) द्वारा अपनाए गए नवीनतम प्रस्तावों में जम्मू‑कश्मीर के उल्लेख को अस्वीकार करने का औपचारिक बयान जारी किया। मंत्रालय ने कहा कि यह भाषा भारत के इस स्थायी दृष्टिकोण के विपरीत है कि यह क्षेत्र देश का अभिन्न हिस्सा है और किसी भी बाहरी टिप्पणी को उसकी संप्रभु अधिकारों का सम्मान करना चाहिए।
OIC, जो 57 मुस्लिम‑बहुल देशों का गठबंधन है, अक्सर विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर प्रस्ताव अपनाता है और कश्मीर विवाद अक्सर उसकी कार्यसूची में रहता है। हालिया दस्तावेज़, जो OIC शिखर सम्मेलन से पहले प्रसारित हुए, जम्मू‑कश्मीर की स्थिति पर पुनः ध्यान देने का आह्वान करते हैं, जिससे भारत ने तुरंत कूटनीतिक प्रतिक्रिया दी।
भारत ने दोबारा कहा कि कश्मीर पर उसका रुख संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय वार्ताओं द्वारा निर्देशित है, और OIC से अनुरोध किया कि वह अपने आधिकारिक पाठों में इस मुद्दे को न जोड़ें। मंत्रालय ने यह भी कहा कि ऐसे उल्लेख चल रही कूटनीतिक बातचीत को जटिल बना सकते हैं और क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि यह अस्वीकार OIC मंचों में कश्मीर मुद्दे के राजनीतिकरण को रोकने के भारत के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है। सरकार भविष्य में OIC सदस्य देशों को भारत की स्थिति का सम्मान करने के लिए लबादा करने की संभावना रखती है।
OIC, जो 57 मुस्लिम‑बहुल देशों का गठबंधन है, अक्सर विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर प्रस्ताव अपनाता है और कश्मीर विवाद अक्सर उसकी कार्यसूची में रहता है। हालिया दस्तावेज़, जो OIC शिखर सम्मेलन से पहले प्रसारित हुए, जम्मू‑कश्मीर की स्थिति पर पुनः ध्यान देने का आह्वान करते हैं, जिससे भारत ने तुरंत कूटनीतिक प्रतिक्रिया दी।
भारत ने दोबारा कहा कि कश्मीर पर उसका रुख संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय वार्ताओं द्वारा निर्देशित है, और OIC से अनुरोध किया कि वह अपने आधिकारिक पाठों में इस मुद्दे को न जोड़ें। मंत्रालय ने यह भी कहा कि ऐसे उल्लेख चल रही कूटनीतिक बातचीत को जटिल बना सकते हैं और क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि यह अस्वीकार OIC मंचों में कश्मीर मुद्दे के राजनीतिकरण को रोकने के भारत के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है। सरकार भविष्य में OIC सदस्य देशों को भारत की स्थिति का सम्मान करने के लिए लबादा करने की संभावना रखती है।