📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Tisha Mukherjee
बिज़नेस
भारत ने समुद्री संरक्षण के लिए ब्लू बॉन्ड्स की योजना बनाई
✍️ The Hindu
🗓 25 सित. 2026, 06:11 AM
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भारत समुद्री संरक्षण, सतत मछली पकड़ना और तटीय बुनियादी ढाँचे के लिए नई वित्तीय साधन ब्लू बॉन्ड्स पर विचार कर रहा है।
समाचार रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय नीति निर्माताओं ने ब्लू बॉन्ड्स की शुरुआत पर विचार किया है, जो समुद्र‑संबंधी परियोजनाओं के लिए पूँजी जुटाने हेतु विशेष ऋण साधन है। यह कदम संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों के तहत भारत की प्रतिबद्धताओं और जलवायु‑अनुकूल निवेश को आकर्षित करने की इच्छा के अनुरूप है।
ब्लू बॉन्ड्स के माध्यम से समुद्री संरक्षित क्षेत्र, सतत जलीय कृषि और तटीय लचीलापन बुनियादी ढाँचे जैसे प्रोजेक्ट्स को वित्तीय सहायता मिल सकती है। अंतर्राष्ट्रीय ग्रीन‑फाइनेंस बाजारों तक पहुँच कर सरकार उधार लागत को कम करने और पर्यावरण‑सुरक्षित विकास को बढ़ावा देने की आशा रखती है।
अधिकारी बताते हैं कि इस प्रकार के बॉन्ड जारी करने की रूपरेखा पर currently समीक्षा चल रही है, जिसमें सरकारी और निजी दोनों जारीकर्ता शामिल हो सकते हैं। यह पहल मौजूदा ग्रीन‑बॉन्ड कार्यक्रमों को पूरक कर भारत के सतत वित्तीय उपकरणों के पोर्टफोलियो को विस्तारित करेगी।
पर्यावरणीय NGOs और उद्योग समूहों ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया है, यह मानते हुए कि समर्पित वित्तीय सहायता समुद्री जैव विविधता और तटीय समुदायों के आजीविका संरक्षण को तेज़ कर सकती है।
पहले ब्लू बॉन्ड की सटीक समय‑सीमा और आकार अभी चर्चा में है, परन्तु भारत के आर्थिक विकास को समुद्री संरक्षण के साथ संतुलित करने की दिशा में यह अवधारणा तेजी से लोकप्रिय हो रही है।
ब्लू बॉन्ड्स के माध्यम से समुद्री संरक्षित क्षेत्र, सतत जलीय कृषि और तटीय लचीलापन बुनियादी ढाँचे जैसे प्रोजेक्ट्स को वित्तीय सहायता मिल सकती है। अंतर्राष्ट्रीय ग्रीन‑फाइनेंस बाजारों तक पहुँच कर सरकार उधार लागत को कम करने और पर्यावरण‑सुरक्षित विकास को बढ़ावा देने की आशा रखती है।
अधिकारी बताते हैं कि इस प्रकार के बॉन्ड जारी करने की रूपरेखा पर currently समीक्षा चल रही है, जिसमें सरकारी और निजी दोनों जारीकर्ता शामिल हो सकते हैं। यह पहल मौजूदा ग्रीन‑बॉन्ड कार्यक्रमों को पूरक कर भारत के सतत वित्तीय उपकरणों के पोर्टफोलियो को विस्तारित करेगी।
पर्यावरणीय NGOs और उद्योग समूहों ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया है, यह मानते हुए कि समर्पित वित्तीय सहायता समुद्री जैव विविधता और तटीय समुदायों के आजीविका संरक्षण को तेज़ कर सकती है।
पहले ब्लू बॉन्ड की सटीक समय‑सीमा और आकार अभी चर्चा में है, परन्तु भारत के आर्थिक विकास को समुद्री संरक्षण के साथ संतुलित करने की दिशा में यह अवधारणा तेजी से लोकप्रिय हो रही है।