📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Päivätön päivä
बिज़नेस
सर्कुलर इकोनॉमी फोरम में भारत-फ़िनलैंड सहयोग पर केंद्रित चर्चा
✍️ The Economic Times
🗓 22 अग. 2026, 11:39 AM
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हालिया सर्कुलर इकोनॉमी फोरम में भारत और फ़िनलैंड के बीच सहयोग पर प्रकाश डाला गया, जिसमें सतत संसाधन प्रबंधन और संयुक्त पहलों पर चर्चा हुई।
पर्यावरण और व्यापार संगठनों द्वारा आयोजित सर्कुलर इकोनॉमी फोरम में भारत‑फ़िनलैंड सहयोग को प्रमुख विषय बनाया गया। दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने कचरे को कम करने, रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने और हरित प्रौद्योगिकियों को विकसित करने के लिए संयुक्त परियोजनाओं का परिचय दिया, जिन्हें विभिन्न बाजारों में लागू किया जा सके।
चर्चा का मुख्य बिंदु फ़िनलैंड की सर्कुलर डिज़ाइन में विशेषज्ञता और भारत की उत्पादन क्षमता को मिलाकर बंद‑लूप सप्लाई चेन बनाना रहा। इलेक्ट्रॉनिक्स, वस्त्र और निर्माण जैसे क्षेत्रों में पायलट कार्यक्रमों को उजागर किया गया, जहाँ संसाधन पुनः प्राप्ति से उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय और फ़िनलैंड के आर्थिक मामलों के मंत्रालय के अधिकारियों ने इस साझेदारी के रणनीतिक महत्व पर बल दिया, यह बताया कि यह भारत के संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों और फ़िनलैंड के जलवायु‑तटस्थ लक्ष्य दोनों के अनुरूप है।
फोरम के अंत में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए, जिसमें सहयोगी अनुसंधान, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और संयुक्त वित्तीय तंत्र का विवरण दिया गया, जिससे सतत विकास पर केंद्रित आर्थिक संबंध और गहरा होगा।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यह सहयोग सर्कुलर व्यापार मॉडल में निवेश को बढ़ावा देगा, जिससे दोनों देशों को संसाधन‑कुशल वैश्विक अर्थव्यवस्था में अग्रणी स्थान मिल सकेगा।
चर्चा का मुख्य बिंदु फ़िनलैंड की सर्कुलर डिज़ाइन में विशेषज्ञता और भारत की उत्पादन क्षमता को मिलाकर बंद‑लूप सप्लाई चेन बनाना रहा। इलेक्ट्रॉनिक्स, वस्त्र और निर्माण जैसे क्षेत्रों में पायलट कार्यक्रमों को उजागर किया गया, जहाँ संसाधन पुनः प्राप्ति से उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय और फ़िनलैंड के आर्थिक मामलों के मंत्रालय के अधिकारियों ने इस साझेदारी के रणनीतिक महत्व पर बल दिया, यह बताया कि यह भारत के संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों और फ़िनलैंड के जलवायु‑तटस्थ लक्ष्य दोनों के अनुरूप है।
फोरम के अंत में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए, जिसमें सहयोगी अनुसंधान, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और संयुक्त वित्तीय तंत्र का विवरण दिया गया, जिससे सतत विकास पर केंद्रित आर्थिक संबंध और गहरा होगा।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यह सहयोग सर्कुलर व्यापार मॉडल में निवेश को बढ़ावा देगा, जिससे दोनों देशों को संसाधन‑कुशल वैश्विक अर्थव्यवस्था में अग्रणी स्थान मिल सकेगा।