📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / BiiJii
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ILO रिपोर्ट: प्रबंधकीय पदों पर महिलाओं के लिए भारत का रैंक सबसे नीचे
✍️ Business Standard
🗓 04 नव. 2026, 10:47 AM
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अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की नई रिपोर्ट के अनुसार, प्रबंधकीय पदों पर महिलाओं की उपस्थिति के मामले में भारत का रैंक वैश्विक स्तर पर सबसे नीचे है।
अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की हाल ही में जारी रिपोर्ट ने भारत में कॉर्पोरेट नेतृत्व में लिंग असमानता को उजागर किया है। डेटा के अनुसार, प्रबंधकीय पदों पर महिलाओं के अनुपात के मामले में भारत का रैंक वैश्विक सूची में सबसे नीचे के करीब है।
यह खोज भारतीय कार्यबल में महिलाओं के वरिष्ठ निर्णायक पदों तक पहुँचने में सामने आने वाली लगातार चुनौतियों को रेखांकित करती है। यह रिपोर्ट उन नीति निर्माताओं और उद्योग नेताओं के लिए एक महत्वपूर्ण मापदंड है जो शीर्ष स्तर पर लिंग विविधता को बढ़ाना चाहते हैं।
हालाँकि प्रारंभिक सारांश में विशिष्ट प्रतिशत आंकड़े विस्तार से नहीं दिए गए, लेकिन रैंकिंग स्वयं भर्ती और प्रमोशन प्रक्रियों में संरचनात्मक बदलावों की ज़रूरत को दर्शाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि लक्षित हस्तक्षेप के बिना, भारत में पुरुष और महिला नेतृत्व के बीच का अंतर बना रहेगा।
ILO का यह मूल्यांकन श्रम बाजार के रुझानों को निगरानी करने और समान रोजगार अवसरों को बढ़ावा देने की वैश्विक प्रयासों का हिस्सा है। भारत के लिए, यह रिपोर्ट महिलाओं की आर्थिक सशक्तिकरण और कार्यस्थल समानता पर चल रहे राष्ट्रीय चर्चा को और गहराई देती है।
यह खोज भारतीय कार्यबल में महिलाओं के वरिष्ठ निर्णायक पदों तक पहुँचने में सामने आने वाली लगातार चुनौतियों को रेखांकित करती है। यह रिपोर्ट उन नीति निर्माताओं और उद्योग नेताओं के लिए एक महत्वपूर्ण मापदंड है जो शीर्ष स्तर पर लिंग विविधता को बढ़ाना चाहते हैं।
हालाँकि प्रारंभिक सारांश में विशिष्ट प्रतिशत आंकड़े विस्तार से नहीं दिए गए, लेकिन रैंकिंग स्वयं भर्ती और प्रमोशन प्रक्रियों में संरचनात्मक बदलावों की ज़रूरत को दर्शाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि लक्षित हस्तक्षेप के बिना, भारत में पुरुष और महिला नेतृत्व के बीच का अंतर बना रहेगा।
ILO का यह मूल्यांकन श्रम बाजार के रुझानों को निगरानी करने और समान रोजगार अवसरों को बढ़ावा देने की वैश्विक प्रयासों का हिस्सा है। भारत के लिए, यह रिपोर्ट महिलाओं की आर्थिक सशक्तिकरण और कार्यस्थल समानता पर चल रहे राष्ट्रीय चर्चा को और गहराई देती है।