🔥 TRENDING सतना बस स्टेड का नामा स्व शंकर लाल तिव... मोतिहारी में छठ घाटों की तैयारी शुरू શિરીષ ભાઈ રબારીની બઢતીથી શિનોર ગામને મ... Samay Raina Confesses to Having a Girl... Tamannaah Bhatia Responds to Skin Tone... Low-Pressure System Brings Heavy Rains...
29 Oct 2026•
ગુજરાતી मराठी ਪੰਜਾਬੀ বাংলা

इलाहाबाद हाईकोर्ट में 28 अक्टूबर को जस्टिस अजय भनोट की अदालत में वकीलों के विरोध प्रदर्शन

✍️ Reporter: Ram Bachan 🗓 29 Oct 2026, 10:12 AM 👁 16
Share: 💬 WhatsApp 📘 Facebook 𝕏 Post

इलाहाबाद हाईकोर्ट में 28 अक्टूबर को जस्टिस अजय भनोट की अदालत में वकीलों के विरोध प्रदर्शन

इलाहाबाद हाईकोर्ट में 28 अक्टूबर को जस्टिस अजय भनोट की अदालत में वकीलों के विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर हंगामा हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शन कर रहे अधिवक्ताओं ने अदालत के भीतर नारेबाजी की और फर्नीचर सहित अन्य सामान फेंके जाने की घटना सामने आई। उस समय जस्टिस अजय भनोट के साथ जस्टिस दिवेश चंद्र सामंत भी अदालत में मौजूद थे। इस घटनाक्रम ने न्यायपालिका और अधिवक्ता समुदाय के बीच बढ़ते तनाव को लेकर गंभीर चर्चा छेड़ दी है।

विवाद की शुरुआत 27 अक्टूबर को हुई, जब इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर जस्टिस अजय भनोट की अदालत में एक अधिवक्ता के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला उठाया। बार एसोसिएशन के अनुसार, अदालत में पुलिस अधिकारियों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के बैठने के लिए अलग कुर्सी की व्यवस्था की गई थी। आरोप है कि एक पुलिस अधीक्षक (SP) उस पंक्ति में बैठ गए, जिसे आमतौर पर अधिवक्ताओं के बैठने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

बताया गया कि एक अधिवक्ता ने SP के वहां बैठने पर आपत्ति जताते हुए उनसे पीछे की ओर बैठने का अनुरोध किया। बार एसोसिएशन का आरोप है कि इस घटनाक्रम के बाद जस्टिस भनोट ने संबंधित अधिवक्ता को पुलिस अधिकारी से माफी मांगने का निर्देश दिया। एसोसिएशन ने यह भी आरोप लगाया कि न्यायाधीश ने अधिवक्ता को जेल भेजने की चेतावनी दी और कार्यवाही के दौरान एक अन्य वरिष्ठ अधिवक्ता का मजाक उड़ाया। इन आरोपों को लेकर बार एसोसिएशन ने मुख्य न्यायाधीश से हस्तक्षेप करने और मामले पर संज्ञान लेने की मांग की थी।

बार एसोसिएशन ने अपने पत्र में चेतावनी दी थी कि यदि कथित दुर्व्यवहार के मामले में उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो अधिवक्ता जस्टिस अजय भनोट की अदालत का बहिष्कार करेंगे। इसी विवाद के अगले दिन अदालत परिसर में विरोध प्रदर्शन हुआ, जिसने मामले को और गंभीर बना दिया। बुधवार को सामने आए वीडियो में कई अधिवक्ता अदालत कक्ष के बाहर एकत्र होकर नारेबाजी करते दिखाई दिए। रिपोर्ट के अनुसार, विरोध के दौरान अदालत के भीतर फर्नीचर और अन्य सामान फेंके जाने की भी खबर सामने आई।

कुछ रिपोर्टों में यह दावा भी किया गया कि जस्टिस भनोट की ओर जूता फेंका गया था, हालांकि इस कथित घटना को फिलहाल पुष्ट तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।

यह पूरा घटनाक्रम कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है—अदालत के भीतर अनुशासन और गरिमा बनाए रखने की जिम्मेदारी कैसे सुनिश्चित की जाए? यदि किसी अधिवक्ता को न्यायिक कार्यवाही के दौरान अनुचित व्यवहार की शिकायत हो, तो उसके समाधान के लिए कौन-सी संस्थागत प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए? वहीं, बार और बेंच के बीच मतभेदों का असर न्यायिक कामकाज और मुकदमों की सुनवाई का इंतजार कर रहे पक्षकारों पर किस तरह पड़ सकता है?

फिलहाल, बार एसोसिएशन के आरोपों और घटनाक्रम से जुड़े अपुष्ट दावों को अलग-अलग समझना जरूरी है। मामले में पारदर्शी संवाद, उचित प्रक्रिया और संस्थागत स्तर पर समाधान की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

#AllahabadHighCourt #IndianJudiciary #Advocate
📲Get App