इफको की मोबाइल मृदा परीक्षण प्रयोगशाला ने देवरी में 67 किसानों की मिट्टी में फास्फोरस व ऑर्गेनिक कार्बन की कमी पाई
इफको की मोबाइल मृदा परीक्षण प्रयोगशाला ने 25 अक्टूबर 2026 को देवरी विकास खंड में 67 किसानों के खेतों की मिट्टी का परीक्षण किया और फास्फोरस व ऑर्गेनिक कार्बन की कमी पाई।
इफको (इफको) की मोबाइल मृदा परीक्षण प्रयोगशाला आज, 25 अक्टूबर 2026 को देवरी विकास खंड में पहुंची, जहाँ 67 किसानों के खेतों की मिट्टी का मौके पर ही परीक्षण किया गया। इस विशेष शिविर के दौरान क्षेत्र के किसानों में उत्साह स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
परीक्षण की प्राथमिक रिपोर्ट में पाया गया कि देवरी विकास खंड की मिट्टी में फास्फोरस (फॉस्फोरस) और ऑर्गेनिक कार्बन (जैविक कार्बन) की मात्रा सामान्य से काफी कम है। ऑर्गेनिक कार्बन की कमी से भूमि की जल धारण क्षमता घटती है और सूक्ष्मजीवों की गतिविधियाँ सुस्त पड़ जाती हैं, जबकि फास्फोरस की कमी पौधों की जड़ों के सही विकास को बाधित करती है, जिससे फसल उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
इस परीक्षण कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी (देवरी) की टीम, इफको प्रयोगशाला अधिकारी और उनकी तकनीकी टीम विशेष रूप से मौजूद रही। सलाह दी गई कि ऑर्गेनिक कार्बन का स्तर सुधारने के लिए गोबर की खाद (एफवाईएम), वर्मीकंपोस्ट (केंचुआ खाद) और हरी खाद (ढेंचा/सनई) का अधिक से अधिक प्रयोग करें। मिट्टी की जांच रिपोर्ट (सॉइल हेल्थ कार्ड) के आधार पर ही डीएपी, एसएसपी या एनपीके का इस्तेमाल करें ताकि फास्फोरस की कमी को दूर किया जा सके। साथ ही फास्फोरस सोल्यूबिलाइजिंग बैक्टीरिया (पीएसबी) का उपयोग बीज उपचार या मिट्टी में मिलाकर किया जा सकता है।
सचालित प्रयोगशाला के सीधे विकास खंड स्तर पर पहुंचने से उपस्थित किसानों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के परीक्षणों से उन्हें वैज्ञानिक तरीके से खेती करने और रासायनिक खादों पर होने वाले अनावश्यक खर्च को बचाने में मदद मिलेगी।
परीक्षण की प्राथमिक रिपोर्ट में पाया गया कि देवरी विकास खंड की मिट्टी में फास्फोरस (फॉस्फोरस) और ऑर्गेनिक कार्बन (जैविक कार्बन) की मात्रा सामान्य से काफी कम है। ऑर्गेनिक कार्बन की कमी से भूमि की जल धारण क्षमता घटती है और सूक्ष्मजीवों की गतिविधियाँ सुस्त पड़ जाती हैं, जबकि फास्फोरस की कमी पौधों की जड़ों के सही विकास को बाधित करती है, जिससे फसल उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
इस परीक्षण कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी (देवरी) की टीम, इफको प्रयोगशाला अधिकारी और उनकी तकनीकी टीम विशेष रूप से मौजूद रही। सलाह दी गई कि ऑर्गेनिक कार्बन का स्तर सुधारने के लिए गोबर की खाद (एफवाईएम), वर्मीकंपोस्ट (केंचुआ खाद) और हरी खाद (ढेंचा/सनई) का अधिक से अधिक प्रयोग करें। मिट्टी की जांच रिपोर्ट (सॉइल हेल्थ कार्ड) के आधार पर ही डीएपी, एसएसपी या एनपीके का इस्तेमाल करें ताकि फास्फोरस की कमी को दूर किया जा सके। साथ ही फास्फोरस सोल्यूबिलाइजिंग बैक्टीरिया (पीएसबी) का उपयोग बीज उपचार या मिट्टी में मिलाकर किया जा सकता है।
सचालित प्रयोगशाला के सीधे विकास खंड स्तर पर पहुंचने से उपस्थित किसानों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के परीक्षणों से उन्हें वैज्ञानिक तरीके से खेती करने और रासायनिक खादों पर होने वाले अनावश्यक खर्च को बचाने में मदद मिलेगी।