📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Sumita Roy Dutta
देश
एचपी हाई कोर्ट ने तलाक के बाद इस्त्रधन रखने को सीमित अवधि के लिए अपराध नहीं माना
✍️ Live Law
🗓 27 अक्टू. 2026, 06:36 AM
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हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने कहा कि तलाक के बाद इस्त्रधन रखने को सीमित अवधि के लिए निरंतर अपराध नहीं माना जाएगा, जिससे विवाहित महिलाओं के अधिकारों में स्पष्टता आई।
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने यह फैसला सुनाया कि तलाक के बाद पत्नी के इस्त्रधन को रखने को सीमित अवधि के लिए निरंतर अपराध नहीं माना जाएगा। न्यायालय ने कहा कि इस्त्रधन का अधिकार एक बार का है और इसे प्रतिदिन धारण करने से नया कारण नहीं बनता।
इस्त्रधन, जो विवाह के समय पति द्वारा पत्नी को दिया जाने वाला पारम्परिक उपहार है, तलाक के बाद अक्सर विवाद का कारण बनता रहा है। पहले के न्यायिक निर्णयों में इस बात की अस्पष्टता थी कि इस्त्रधन को रखने को निरंतर अपराध माना जाए तो मुकदमे की सीमित अवधि बढ़ सकती है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह दावा निरंतर अपराध नहीं है, जिससे सीमित अवधि निश्चित हो गई है और तलाकशुदा महिलाओं को निर्धारित समय में इस्त्रधन की वसूली का अधिकार मिलेगा, बिना अनिश्चित विस्तार के।
यह निर्णय व्यक्तिगत कानून की परम्पराओं को प्रक्रियात्मक स्पष्टता के साथ संतुलित करने के प्रयास को दर्शाता है, जिससे इस्त्रधन के अधिकार को लागू किया जा सकेगा, परन्तु सामान्य सीमित अवधि के भीतर।
इस्त्रधन, जो विवाह के समय पति द्वारा पत्नी को दिया जाने वाला पारम्परिक उपहार है, तलाक के बाद अक्सर विवाद का कारण बनता रहा है। पहले के न्यायिक निर्णयों में इस बात की अस्पष्टता थी कि इस्त्रधन को रखने को निरंतर अपराध माना जाए तो मुकदमे की सीमित अवधि बढ़ सकती है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह दावा निरंतर अपराध नहीं है, जिससे सीमित अवधि निश्चित हो गई है और तलाकशुदा महिलाओं को निर्धारित समय में इस्त्रधन की वसूली का अधिकार मिलेगा, बिना अनिश्चित विस्तार के।
यह निर्णय व्यक्तिगत कानून की परम्पराओं को प्रक्रियात्मक स्पष्टता के साथ संतुलित करने के प्रयास को दर्शाता है, जिससे इस्त्रधन के अधिकार को लागू किया जा सकेगा, परन्तु सामान्य सीमित अवधि के भीतर।