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देश
एचपी हाई कोर्ट: विदेशी नागरिकता के आधार पर पासपोर्ट आवेदन नहीं अस्वीकारे जा सकते
✍️ Live Law
🗓 06 नव. 2026, 01:37 AM
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हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने निर्णय दिया है कि आवेदक के पास विदेशी नागरिकता होने के आधार पर पासपोर्ट आवेदन को अस्वीकार नहीं किया जा सकता, जिससे प्रक्रिया में न्यायिक सुविधा सुनिश्चित होगी।
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने भारत में पासपोर्ट आवेदनों की प्रक्रिया के संबंध में एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। बेंच ने स्पष्ट किया है कि अधिकारी आवेदक के पास विदेशी नागरिकता होने के एकमात्र आधार पर आवेदन को अस्वीकार नहीं कर सकते। यह निर्णय पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया को न्यायसंगत और मनमानी अस्वीकृतियों से मुक्त रखने के उद्देश्य से लिया गया है।
कोर्ट ने अवलोकन किया कि विदेशी नागरिकता रखना स्वतः ही किसी व्यक्ति को भारतीय पासपोर्ट के लिए आवेदन करने से अयोग्य नहीं बनाता, बशर्ते वे अन्य कानूनी आवश्यकताओं को पूरा करते हों। इस फैसले में प्रशासनिक निकायों को इस बात पर जोर दिया गया है कि वे अस्वीकृति के लिए एकमात्र आधार के रूप में इस बात का उपयोग करने के बजाय उचित प्रक्रिया का पालन करें।
यह कानूनी स्पष्टीकरण उन मामलों के संसाधन पर प्रभाव डालने की उम्मीद है जिनमें द्वितीय या विदेशी नागरिकता वाले व्यक्ति शामिल हैं। यह सिद्धांत को पुनर्स्थापित करता है कि प्रत्येक आवेदन को मौजूदा कानूनों के अनुपालन और उसकी गुणवत्ता के आधार पर मूल्यांकित किया जाना चाहिए, न कि किसी एक तकनीकी कारण से खारिज किया जाना चाहिए।
यह फैसला देश भर में समान मामलों के लिए एक मार्गदर्शक पूर्वोदाहरण के रूप में कार्य करेगा, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि जटिल नागरिकता स्थिति वाले नागरिकों और निवासियों को सरकारी एजेंसियों द्वारा समान रूप से व्यवहार किया जाए।
कोर्ट ने अवलोकन किया कि विदेशी नागरिकता रखना स्वतः ही किसी व्यक्ति को भारतीय पासपोर्ट के लिए आवेदन करने से अयोग्य नहीं बनाता, बशर्ते वे अन्य कानूनी आवश्यकताओं को पूरा करते हों। इस फैसले में प्रशासनिक निकायों को इस बात पर जोर दिया गया है कि वे अस्वीकृति के लिए एकमात्र आधार के रूप में इस बात का उपयोग करने के बजाय उचित प्रक्रिया का पालन करें।
यह कानूनी स्पष्टीकरण उन मामलों के संसाधन पर प्रभाव डालने की उम्मीद है जिनमें द्वितीय या विदेशी नागरिकता वाले व्यक्ति शामिल हैं। यह सिद्धांत को पुनर्स्थापित करता है कि प्रत्येक आवेदन को मौजूदा कानूनों के अनुपालन और उसकी गुणवत्ता के आधार पर मूल्यांकित किया जाना चाहिए, न कि किसी एक तकनीकी कारण से खारिज किया जाना चाहिए।
यह फैसला देश भर में समान मामलों के लिए एक मार्गदर्शक पूर्वोदाहरण के रूप में कार्य करेगा, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि जटिल नागरिकता स्थिति वाले नागरिकों और निवासियों को सरकारी एजेंसियों द्वारा समान रूप से व्यवहार किया जाए।