📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Yann Forget
अपराध
भारतीय न्याय संहिता के हिट‑एंड‑रन प्रावधान को दो साल बीतने के बाद भी लागू नहीं किया गया
✍️ Hindustan Times
🗓 26 अक्टू. 2026, 12:02 PM
👁 18
भारतीय न्याय संहिता के लागू होने को दो साल हो चुके हैं, पर हिट‑एंड‑रन मामलों के लिए निर्धारित प्रावधान अभी तक सक्रिय नहीं हुआ है।
भारतीय न्याय संहिता, भारत का नया आपराधिक संहिता, हिट‑एंड‑रन मामलों को रोकने के लिए विशेष प्रावधान के साथ पारित हुई थी। इस प्रावधान का उद्देश्य दुर्घटना स्थल से भागने वाले चालकों पर कड़ी सजा देना और पीड़ितों की सुरक्षा को सुदृढ़ करना था।
हालाँकि संहिता का अधिकांश भाग लागू हो चुका है, हिट‑एंड‑रन धारा अभी तक सक्रिय नहीं हुई है। इस धारा को लागू करने के लिए कोई नियम, अधिसूचना या कार्यान्वयन दिशानिर्देश जारी नहीं किए गए हैं, जिससे यह प्रभावहीन रह गई है।
कानूनी विशेषज्ञों और सड़क‑सुरक्षा NGOs ने इस देरी को लेकर चिंता व्यक्त की है, क्योंकि इससे दुर्घटना पीड़ितों को त्वरित न्याय नहीं मिल पाता। उनका मानना है कि धारा के बिना, अपराधी मौजूदा कम विशिष्ट प्रावधानों के तहत ही दंडित होते हैं।
सरकारी अधिकारियों ने बताया कि विस्तृत प्रक्रियात्मक नियमों की तैयारी में देरी के कारण यह स्थिति बनी हुई है, परन्तु अभी तक कोई निश्चित समय‑सीमा नहीं दी गई है। यह देरी नई संहिता के उद्देश्यों को व्यावहारिक रूप में लागू करने की व्यापक चुनौती को दर्शाती है।
जब तक यह धारा सक्रिय नहीं होती, तब तक हिट‑एंड‑रन के मामलों में निवारक प्रभाव कम ही रहेगा, जिससे देश भर में इस प्रकार की घटनाओं को रोकना कठिन बना रहेगा।
हालाँकि संहिता का अधिकांश भाग लागू हो चुका है, हिट‑एंड‑रन धारा अभी तक सक्रिय नहीं हुई है। इस धारा को लागू करने के लिए कोई नियम, अधिसूचना या कार्यान्वयन दिशानिर्देश जारी नहीं किए गए हैं, जिससे यह प्रभावहीन रह गई है।
कानूनी विशेषज्ञों और सड़क‑सुरक्षा NGOs ने इस देरी को लेकर चिंता व्यक्त की है, क्योंकि इससे दुर्घटना पीड़ितों को त्वरित न्याय नहीं मिल पाता। उनका मानना है कि धारा के बिना, अपराधी मौजूदा कम विशिष्ट प्रावधानों के तहत ही दंडित होते हैं।
सरकारी अधिकारियों ने बताया कि विस्तृत प्रक्रियात्मक नियमों की तैयारी में देरी के कारण यह स्थिति बनी हुई है, परन्तु अभी तक कोई निश्चित समय‑सीमा नहीं दी गई है। यह देरी नई संहिता के उद्देश्यों को व्यावहारिक रूप में लागू करने की व्यापक चुनौती को दर्शाती है।
जब तक यह धारा सक्रिय नहीं होती, तब तक हिट‑एंड‑रन के मामलों में निवारक प्रभाव कम ही रहेगा, जिससे देश भर में इस प्रकार की घटनाओं को रोकना कठिन बना रहेगा।