📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / UnpetitproleX
स्वास्थ्य
हिमाचल प्रदेश ने पीजीआई, एआईआईएमएस स्नातकोत्तर को शामिल करने के लिए रेजिडेंट डॉक्टर नीति में बदलाव किया
✍️ Medical Dialogues
🗓 20 अक्टू. 2026, 02:15 PM
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हिमाचल प्रदेश सरकार ने अपने रेजिडेंट डॉक्टरों की भर्ती नीति में बदलाव कर पीजीआई और एआईआईएमएस के पोस्ट‑ग्रेजुएट डॉक्टरों को राज्य के अस्पतालों में नियुक्त करने की अनुमति दी है।
राज्य स्वास्थ्य विभाग ने बुधवार को एक अधिसूचना जारी की, जिसमें रेजिडेंट डॉक्टर नीति में बदलाव कर पीजीआई (पोस्ट‑ग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च) और एआईआईएमएस (ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़) से स्नातकोत्तर डिग्रीधारक डॉक्टरों को राज्य के अस्पतालों में नियुक्त करने की अनुमति दी गई है। यह संशोधन विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर करने और सार्वजनिक अस्पतालों की क्षमताओं को बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया है।
नई दिशा‑निर्देशों के अनुसार, पात्र उम्मीदवारों को पीजीआई या एआईआईएमएस से मान्यताप्राप्त पोस्ट‑ग्रेजुएट डिग्री होनी चाहिए और आयु सीमा, सेवा बंधन आदि मानक पात्रता मानदंडों को पूरा करना होगा। चयन प्रक्रिया राज्य स्वास्थ्य भर्ती बोर्ड द्वारा संचालित सामान्य मेरिट‑आधारित प्रक्रिया के तहत होगी।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि इस कदम से शिमला के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज और कांगड़ा के डॉ. राजेंद्र प्रसाद सरकारी मेडिकल कॉलेज जैसे तृतीयक देखभाल केंद्रों में रोगी देखभाल की गुणवत्ता में सुधार होगा। अगले भर्ती चक्र से आवेदन स्वीकार किए जाएंगे, और विस्तृत जानकारी आधिकारिक स्वास्थ्य मंत्रालय पोर्टल पर प्रकाशित की जाएगी।
यह नीति राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख संस्थानों से प्रशिक्षित विशेषज्ञों को राज्य स्वास्थ्य प्रणाली में शामिल करने की प्रवृत्ति को दर्शाती है। यह पीजीआई और एआईआईएमएस के स्नातकोत्तर अभ्यर्थियों को सरकारी सेवा में एक नया करियर मार्ग भी प्रदान करती है।
चिकित्सा संघों सहित कई हितधारकों ने इस बदलाव का स्वागत किया, यह कहा कि इससे निजी सुविधाओं में रोगियों के प्रवाह में कमी आएगी और हिमाचल प्रदेश की सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढाँचे की समग्र क्षमता में वृद्धि होगी।
नई दिशा‑निर्देशों के अनुसार, पात्र उम्मीदवारों को पीजीआई या एआईआईएमएस से मान्यताप्राप्त पोस्ट‑ग्रेजुएट डिग्री होनी चाहिए और आयु सीमा, सेवा बंधन आदि मानक पात्रता मानदंडों को पूरा करना होगा। चयन प्रक्रिया राज्य स्वास्थ्य भर्ती बोर्ड द्वारा संचालित सामान्य मेरिट‑आधारित प्रक्रिया के तहत होगी।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि इस कदम से शिमला के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज और कांगड़ा के डॉ. राजेंद्र प्रसाद सरकारी मेडिकल कॉलेज जैसे तृतीयक देखभाल केंद्रों में रोगी देखभाल की गुणवत्ता में सुधार होगा। अगले भर्ती चक्र से आवेदन स्वीकार किए जाएंगे, और विस्तृत जानकारी आधिकारिक स्वास्थ्य मंत्रालय पोर्टल पर प्रकाशित की जाएगी।
यह नीति राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख संस्थानों से प्रशिक्षित विशेषज्ञों को राज्य स्वास्थ्य प्रणाली में शामिल करने की प्रवृत्ति को दर्शाती है। यह पीजीआई और एआईआईएमएस के स्नातकोत्तर अभ्यर्थियों को सरकारी सेवा में एक नया करियर मार्ग भी प्रदान करती है।
चिकित्सा संघों सहित कई हितधारकों ने इस बदलाव का स्वागत किया, यह कहा कि इससे निजी सुविधाओं में रोगियों के प्रवाह में कमी आएगी और हिमाचल प्रदेश की सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढाँचे की समग्र क्षमता में वृद्धि होगी।