📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / UnpetitproleX
विज्ञान
हिमाचल प्रदेश प्रतिनिधिमंडल ने आईएसएआरसी में जलवायु‑स्थिर तकनीकों का सर्वेक्षण किया
✍️ The Times of India
🗓 08 अक्टू. 2026, 05:01 AM
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हिमाचल प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल ने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन अनुसंधान केंद्र (आईएसएआरसी) का दौरा कर जलवायु‑स्थिर नवाचारों का अध्ययन किया।
हिमाचल प्रदेश सरकार की एक उच्चस्तरीय टीम ने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन अनुसंधान केंद्र (आईएसएआरसी) का दौरा किया, जहाँ जलवायु‑स्थिर समाधान पर चर्चा हुई। यह यात्रा अक्टूबर के शुरुआती दिनों में हुई, जिसका उद्देश्य राज्य की पहाड़ी क्षेत्रों में बदलते मौसम के प्रभावों को कम करने के लिये नई तकनीकों की पहचान करना था।
दौरे के दौरान अधिकारियों को सौर‑ऊर्जा‑संचालित सिंचाई प्रणाली, कम‑कार्बन निर्माण सामग्री और उन्नत मौसम‑पूर्वानुमान उपकरणों सहित कई नवाचारों की जानकारी दी गई। आईएसएआरसी के शोधकर्ताओं ने जल की हानि को घटाने, ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और अत्यधिक घटनाओं के लिये समुदाय की तैयारी को सुदृढ़ करने वाले प्रोटोटाइप प्रस्तुत किए।
हिमाचल प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि इन जानकारियों को राज्य के जोखिम‑ग्रस्त जिलों में, जहाँ भूस्खलन और सूखा अधिक होता है, पायलट परियोजनाओं में लागू किया जा सकता है। दोनों पक्षों ने सहयोगी ढाँचा स्थापित करने की इच्छा जताई, जिससे प्रदर्शित तकनीकों को परीक्षण और अनुकूलित किया जा सके।
राज्य के अधिकारी इस कदम को हिमाचल प्रदेश की व्यापक जलवायु‑कार्रवाई योजना के साथ संरेखित मानते हैं, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा और स्थायी बुनियादी ढाँचा को विकास के मूलभूत तत्व के रूप में शामिल किया गया है। यह यात्रा राष्ट्रीय अनुसंधान क्षमता को स्थानीय अनुकूलन के लिये उपयोग करने की दिशा में एक ठोस कदम है।
दौरे के दौरान अधिकारियों को सौर‑ऊर्जा‑संचालित सिंचाई प्रणाली, कम‑कार्बन निर्माण सामग्री और उन्नत मौसम‑पूर्वानुमान उपकरणों सहित कई नवाचारों की जानकारी दी गई। आईएसएआरसी के शोधकर्ताओं ने जल की हानि को घटाने, ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और अत्यधिक घटनाओं के लिये समुदाय की तैयारी को सुदृढ़ करने वाले प्रोटोटाइप प्रस्तुत किए।
हिमाचल प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि इन जानकारियों को राज्य के जोखिम‑ग्रस्त जिलों में, जहाँ भूस्खलन और सूखा अधिक होता है, पायलट परियोजनाओं में लागू किया जा सकता है। दोनों पक्षों ने सहयोगी ढाँचा स्थापित करने की इच्छा जताई, जिससे प्रदर्शित तकनीकों को परीक्षण और अनुकूलित किया जा सके।
राज्य के अधिकारी इस कदम को हिमाचल प्रदेश की व्यापक जलवायु‑कार्रवाई योजना के साथ संरेखित मानते हैं, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा और स्थायी बुनियादी ढाँचा को विकास के मूलभूत तत्व के रूप में शामिल किया गया है। यह यात्रा राष्ट्रीय अनुसंधान क्षमता को स्थानीय अनुकूलन के लिये उपयोग करने की दिशा में एक ठोस कदम है।