📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Sumita Roy Dutta
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हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने इको‑ज़ोन को नुकसान से बचाने के लिए वन सड़क मंजूरी रोक दी
✍️ The News Mill
🗓 20 अग. 2026, 10:36 AM
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हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने इको‑ज़ोन को नुकसान से बचाने के लिए सभी वन सड़क मंजूरी को रोकने का आदेश दिया है। यह निर्णय राज्य के संवेदनशील वन पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा के लिए है।
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य में सभी नई वन सड़क मंजूरी को रोकने का अंतरिम आदेश जारी किया है। कोर्ट ने कहा कि कई प्रस्तावित परियोजनाएँ संरक्षित इको‑ज़ोन में प्रवेश कर सकती हैं, जिससे जैव विविधता को खतरा और भूस्खलन की संभावना बढ़ेगी।
पर्यावरण संगठनों के प्रतिनिधियों ने तर्क दिया कि मौजूदा मंजूरी प्रक्रिया पर्यावरणीय प्रभाव का पर्याप्त मूल्यांकन नहीं करती। इसके जवाब में कोर्ट ने वन विभाग को सभी लंबित मंजूरी को तब तक रोकने का निर्देश दिया, जब तक विस्तृत पर्यावरणीय प्रभाव आकलन पूरा नहीं हो जाता।
यह निर्णय हिमाचल प्रदेश के संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्रों में विकास कार्यों की न्यायिक जांच को उजागर करता है। राज्य वन विभाग को 30 दिनों के भीतर सभी लंबित परियोजनाओं पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है।
हालांकि यह आदेश सभी बुनियादी ढाँचा कार्यों पर प्रतिबंध नहीं लगाता, यह भविष्य में किसी भी सड़क निर्माण को कड़े पर्यावरणीय मानकों के अनुसार चलाने की आवश्यकता पर बल देता है। यह निर्णय अन्य हिमालयी राज्यों में समान मामलों को भी प्रभावित कर सकता है, जहाँ वन संरक्षण प्राथमिकता है।
स्थानीय ठेकेदारों और पर्यटन उद्योग के प्रतिनिधियों ने संभावित देरी को लेकर चिंता जताई, परन्तु पर्यावरण समर्थकों ने इसे राज्य की प्राकृतिक धरोहर की रक्षा के लिए आवश्यक कदम माना।
पर्यावरण संगठनों के प्रतिनिधियों ने तर्क दिया कि मौजूदा मंजूरी प्रक्रिया पर्यावरणीय प्रभाव का पर्याप्त मूल्यांकन नहीं करती। इसके जवाब में कोर्ट ने वन विभाग को सभी लंबित मंजूरी को तब तक रोकने का निर्देश दिया, जब तक विस्तृत पर्यावरणीय प्रभाव आकलन पूरा नहीं हो जाता।
यह निर्णय हिमाचल प्रदेश के संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्रों में विकास कार्यों की न्यायिक जांच को उजागर करता है। राज्य वन विभाग को 30 दिनों के भीतर सभी लंबित परियोजनाओं पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है।
हालांकि यह आदेश सभी बुनियादी ढाँचा कार्यों पर प्रतिबंध नहीं लगाता, यह भविष्य में किसी भी सड़क निर्माण को कड़े पर्यावरणीय मानकों के अनुसार चलाने की आवश्यकता पर बल देता है। यह निर्णय अन्य हिमालयी राज्यों में समान मामलों को भी प्रभावित कर सकता है, जहाँ वन संरक्षण प्राथमिकता है।
स्थानीय ठेकेदारों और पर्यटन उद्योग के प्रतिनिधियों ने संभावित देरी को लेकर चिंता जताई, परन्तु पर्यावरण समर्थकों ने इसे राज्य की प्राकृतिक धरोहर की रक्षा के लिए आवश्यक कदम माना।