📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Sumita Roy Dutta
नौकरी
हिमाचल हाई कोर्ट ने निजी व्हाट्सएप चैट्स के कारण बर्खास्तगी पर रोक
✍️ The Times of India
🗓 23 सित. 2026, 05:15 AM
👁 15
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने कहा कि निजी व्हाट्सएप संदेशों के आधार पर किसी को बर्खास्त नहीं किया जा सकता, जिससे बर्खास्तगी में वैध कारणों की आवश्यकता पर बल दिया गया।
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट की एक बेंच ने स्पष्ट किया कि नियोक्ता किसी कर्मचारी को केवल उसकी निजी व्हाट्सएप बातचीत के आधार पर बर्खास्त नहीं कर सकता। कोर्ट ने कहा कि बर्खास्तगी के लिए वैध कारण होना चाहिए, जैसे कि सिद्ध होने वाला अनुशासनहीन व्यवहार या अनुबंध का उल्लंघन, न कि व्यक्तिगत संदेश जो कार्य प्रदर्शन से सीधे जुड़े न हों।
यह निर्णय एक याचिका के बाद आया, जिसमें नियोक्ता ने कर्मचारी को उसकी निजी समूह चैट्स को एकमात्र कारण बताकर निकाल दिया था। कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि निजी संदेशों की गोपनीयता का सम्मान किया जाना चाहिए, जब तक कि उनका सामग्री कार्यस्थल को प्रभावित न करे।
कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि यह फैसला मौजूदा श्रम कानून सिद्धांतों को सुदृढ़ करता है, जिससे नियोक्ताओं को अनुबंध समाप्त करने से पहले उचित प्रक्रिया और ठोस सबूत प्रदान करने की आवश्यकता होगी। यह निर्णय डिजिटल संचार और कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़ी भविष्य की विवादों में मार्गदर्शक होगा।
कोर्ट ने नियोक्ता को आदेश दिया कि वह कर्मचारी को पुनः नियुक्त करे और बर्खास्तगी के दौरान का वेतन वापस दे, बशर्ते किसी वास्तविक अनुशासनहीनता का विस्तृत मूल्यांकन किया जाए जो निजी चैट्स से अलग हो।
यह मिसाल भारतीय कार्यस्थलों में प्रौद्योगिकी की गोपनीयता और श्रम नियमों के संतुलन में न्यायपालिका की भूमिका को उजागर करती है।
यह निर्णय एक याचिका के बाद आया, जिसमें नियोक्ता ने कर्मचारी को उसकी निजी समूह चैट्स को एकमात्र कारण बताकर निकाल दिया था। कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि निजी संदेशों की गोपनीयता का सम्मान किया जाना चाहिए, जब तक कि उनका सामग्री कार्यस्थल को प्रभावित न करे।
कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि यह फैसला मौजूदा श्रम कानून सिद्धांतों को सुदृढ़ करता है, जिससे नियोक्ताओं को अनुबंध समाप्त करने से पहले उचित प्रक्रिया और ठोस सबूत प्रदान करने की आवश्यकता होगी। यह निर्णय डिजिटल संचार और कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़ी भविष्य की विवादों में मार्गदर्शक होगा।
कोर्ट ने नियोक्ता को आदेश दिया कि वह कर्मचारी को पुनः नियुक्त करे और बर्खास्तगी के दौरान का वेतन वापस दे, बशर्ते किसी वास्तविक अनुशासनहीनता का विस्तृत मूल्यांकन किया जाए जो निजी चैट्स से अलग हो।
यह मिसाल भारतीय कार्यस्थलों में प्रौद्योगिकी की गोपनीयता और श्रम नियमों के संतुलन में न्यायपालिका की भूमिका को उजागर करती है।