📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Sumita Roy Dutta
शिक्षा
हिमाचल हाई कोर्ट ने कहा, बिना पक्षपात के साक्षात्कार अंक पुनः नहीं देखे जा सकते
✍️ Live Law
🗓 20 सित. 2026, 09:36 PM
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हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने कहा कि बिना स्पष्ट पक्षपात के साक्षात्कार अंक या तुलनात्मक मेरिट को अदालतें पुनः नहीं देख सकतीं।
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया में साक्षात्कार अंक या तुलनात्मक मेरिट को अदालतें तब तक पुनः नहीं देख सकतीं जब तक कि पक्षपात या दुष्प्रेरणा के स्पष्ट प्रमाण प्रस्तुत न किए जाएँ। यह निर्णय एक राज्य भर्ती में उम्मीदवारों द्वारा साक्षात्कार मूल्यांकन को लेकर दायर की गई चुनौती के बाद दिया गया।
bench ने कहा कि साक्षात्कार अंक चयन समिति की विवेकाधीन प्रक्रिया का हिस्सा हैं और न्यायालयों को केवल तब ही हस्तक्षेप करना चाहिए जब चयन में स्पष्ट अनुचित व्यवहार या पक्षपात सिद्ध हो। केवल परिणाम से असंतोष को आधार बनाकर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह ruling चयन समितियों के विवेक को सम्मानित करने के सिद्धांत को मजबूत करती है और भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक स्पष्ट मानदंड स्थापित करती है। अब उम्मीदवारों को पक्षपात के ठोस सबूत पेश करने होंगे, न कि केवल व्यक्तिगत असंतोष।
यह निर्णय पूरे भारत में सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र की भर्ती में समान विवादों को प्रभावित करने की संभावना रखता है, जहाँ साक्षात्कार का स्कोर मेरिट गणना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
bench ने कहा कि साक्षात्कार अंक चयन समिति की विवेकाधीन प्रक्रिया का हिस्सा हैं और न्यायालयों को केवल तब ही हस्तक्षेप करना चाहिए जब चयन में स्पष्ट अनुचित व्यवहार या पक्षपात सिद्ध हो। केवल परिणाम से असंतोष को आधार बनाकर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह ruling चयन समितियों के विवेक को सम्मानित करने के सिद्धांत को मजबूत करती है और भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक स्पष्ट मानदंड स्थापित करती है। अब उम्मीदवारों को पक्षपात के ठोस सबूत पेश करने होंगे, न कि केवल व्यक्तिगत असंतोष।
यह निर्णय पूरे भारत में सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र की भर्ती में समान विवादों को प्रभावित करने की संभावना रखता है, जहाँ साक्षात्कार का स्कोर मेरिट गणना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।