📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / President's Secretariat
शिक्षा
हिमाचल के राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने डोगरी थियेटर पर तीन पुस्तकें जारी कीं
✍️ The Earth News
🗓 21 अक्टू. 2026, 02:16 AM
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हिमाचल के राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने डोगरी थियेटर के इतिहास और विकास पर केंद्रित तीन नई पुस्तकें जारी कीं।
हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने डोगरी थियेटर के विकास को दर्ज करने वाली तीन पुस्तकों के विमोचन समारोह का संचालन किया। यह कार्यक्रम राज्यपाल के आधिकारिक निवास में आयोजित हुआ, जहाँ प्रत्येक पुस्तक का संक्षिप्त परिचय और डोगरी नाटकों के अंश प्रस्तुत किए गए।
इन पुस्तकों को विद्वानों और थियेटर कलाकारों ने मिलकर तैयार किया है, जो डोगरी मंच कला के लोक प्रारम्भ से लेकर आधुनिक प्रयोगात्मक रूपों तक की यात्रा को दर्शाती हैं। इसमें अनुभवी कलाकारों के साक्षात्कार, पुरानी तस्वीरें और भाषा संबंधी विश्लेषण शामिल हैं, जो डोगरी थियेटर को अन्य उत्तर भारतीय नाट्य परम्पराओं से अलग पहचान देते हैं।
राज्यपाल गुप्ता ने अपने भाषण में स्वदेशी कला रूपों के संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता पर बल दिया, और कहा कि डोगरी थियेटर हिमालयी तलहटी की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों और सांस्कृतिक संगठनों से इन पुस्तकों को पाठ्यक्रम और सार्वजनिक पुस्तकालयों में शामिल करने का आग्रह किया, ताकि छात्रों और कला प्रेमियों को इसका लाभ मिल सके।
इन तीन पुस्तकों को हिमाचल प्रदेश और जम्मू‑कश्मीर के पुस्तकालयों में उपलब्ध कराया जाएगा, और इस वर्ष के अंत में डिजिटल संस्करण जारी करने की योजना भी बनाई गई है, जिससे व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँच सुनिश्चित हो सके।
इन पुस्तकों को विद्वानों और थियेटर कलाकारों ने मिलकर तैयार किया है, जो डोगरी मंच कला के लोक प्रारम्भ से लेकर आधुनिक प्रयोगात्मक रूपों तक की यात्रा को दर्शाती हैं। इसमें अनुभवी कलाकारों के साक्षात्कार, पुरानी तस्वीरें और भाषा संबंधी विश्लेषण शामिल हैं, जो डोगरी थियेटर को अन्य उत्तर भारतीय नाट्य परम्पराओं से अलग पहचान देते हैं।
राज्यपाल गुप्ता ने अपने भाषण में स्वदेशी कला रूपों के संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता पर बल दिया, और कहा कि डोगरी थियेटर हिमालयी तलहटी की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों और सांस्कृतिक संगठनों से इन पुस्तकों को पाठ्यक्रम और सार्वजनिक पुस्तकालयों में शामिल करने का आग्रह किया, ताकि छात्रों और कला प्रेमियों को इसका लाभ मिल सके।
इन तीन पुस्तकों को हिमाचल प्रदेश और जम्मू‑कश्मीर के पुस्तकालयों में उपलब्ध कराया जाएगा, और इस वर्ष के अंत में डिजिटल संस्करण जारी करने की योजना भी बनाई गई है, जिससे व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँच सुनिश्चित हो सके।