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भाई के दस्तावेज़ की पुष्टि के बाद हाई कोर्ट ने 3.5 एकड़ के दावे को खारिज किया
✍️ Times of India
🗓 27 सित. 2026, 11:39 AM
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हाई कोर्ट ने कहा कि मौखिक विभाजन से 3.5 एकड़ की जमीन का दावा नहीं बनाया जा सकता, भाई के बिक्री दस्तावेज़ की पुष्टि के बाद बच्चों को केवल 50 सेंट का छोटा हिस्सा मिला।
हाई कोर्ट ने एक पारिवारिक विवाद की सुनवाई की, जिसमें 3.5 एकड़ वसीयत वाली जमीन का दावा था। एक भाई ने अपने हिस्से का बिक्री दस्तावेज़ प्रमाणित किया था, जिसे अदालत ने मान्य माना।
कोर्ट ने कहा कि मौखिक विभाजन, जो लिखित रूप में दर्ज नहीं है, संपत्ति के अधिकार स्थापित नहीं कर सकता। इसलिए, मौखिक विभाजन को सबूत के रूप में स्वीकार नहीं किया गया।
इस फैसले के बाद, मृतक के बच्चों को 3.5 एकड़ का दावा खोना पड़ा और केवल 50 सेंट का छोटा हिस्सा मिला। यह निर्णय भूमि विभाजन को लिखित और पंजीकृत करने के महत्व को रेखांकित करता है।
कोर्ट ने कहा कि मौखिक विभाजन, जो लिखित रूप में दर्ज नहीं है, संपत्ति के अधिकार स्थापित नहीं कर सकता। इसलिए, मौखिक विभाजन को सबूत के रूप में स्वीकार नहीं किया गया।
इस फैसले के बाद, मृतक के बच्चों को 3.5 एकड़ का दावा खोना पड़ा और केवल 50 सेंट का छोटा हिस्सा मिला। यह निर्णय भूमि विभाजन को लिखित और पंजीकृत करने के महत्व को रेखांकित करता है।