📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Harvinder Chandigarh
राजनीति
हाई कोर्ट ने चंडीगढ़ की अनोखी स्थिति की सुरक्षा के कानून को मान्य किया
✍️ Live Law
🗓 25 सित. 2026, 03:37 AM
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पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने कहा कि आजीविका का अधिकार चंडीगढ़ की अनोखी स्थिति के संरक्षण वाले कानून को नहीं तोड़ सकता, इस विशेष नियम को बरकरार रखा गया।
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने चंडीगढ़ की अनोखी शहरी संरचना को सुरक्षित रखने वाले कानून के विरुद्ध आजीविका के अधिकार को चुनौती देने वाले याचिका पर फैसला सुनाया। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि चंडीगढ़ संरक्षण अधिनियम द्वारा लगाए गए कुछ प्रतिबंध उनके आजीविका अधिकार का उल्लंघन करते हैं।
न्यायालय ने कहा कि आजीविका का अधिकार मौलिक अधिकार है, परन्तु यह चंडीगढ़ की नियोजित और विशिष्ट प्रकृति को संरक्षित करने वाले विशेष कानूनों से मुक्त नहीं करता। कोर्ट ने इस बात पर बल दिया कि शहर की योजना, वास्तुकला और भूमि‑उपयोग नीतियों को विशेष विधायी प्रावधानों द्वारा सुरक्षित किया गया है, और किसी भी उल्लंघन को उसी संदर्भ में देखना होगा।
इस निर्णय से चंडीगढ़ संरक्षण अधिनियम की वैधता मजबूत होती है और भविष्य में व्यावसायिक गतिविधियों या भूमि उपयोग से जुड़ी विवादों को शहर की विशेष स्थिति के आधार पर ही मूल्यांकन किया जाएगा। स्थानीय व्यवसायियों और शहरी नियोजकों को अब इन नियमों के अनुरूप कार्य करना पड़ेगा।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला मौलिक अधिकारों और चंडीगढ़ के नियोजित माहौल को बनाए रखने की आवश्यकता के बीच संतुलन स्थापित करता है, जो भारत में शहरी विकास की चर्चा में अक्सर उल्लेखित मॉडल है।
न्यायालय ने कहा कि आजीविका का अधिकार मौलिक अधिकार है, परन्तु यह चंडीगढ़ की नियोजित और विशिष्ट प्रकृति को संरक्षित करने वाले विशेष कानूनों से मुक्त नहीं करता। कोर्ट ने इस बात पर बल दिया कि शहर की योजना, वास्तुकला और भूमि‑उपयोग नीतियों को विशेष विधायी प्रावधानों द्वारा सुरक्षित किया गया है, और किसी भी उल्लंघन को उसी संदर्भ में देखना होगा।
इस निर्णय से चंडीगढ़ संरक्षण अधिनियम की वैधता मजबूत होती है और भविष्य में व्यावसायिक गतिविधियों या भूमि उपयोग से जुड़ी विवादों को शहर की विशेष स्थिति के आधार पर ही मूल्यांकन किया जाएगा। स्थानीय व्यवसायियों और शहरी नियोजकों को अब इन नियमों के अनुरूप कार्य करना पड़ेगा।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला मौलिक अधिकारों और चंडीगढ़ के नियोजित माहौल को बनाए रखने की आवश्यकता के बीच संतुलन स्थापित करता है, जो भारत में शहरी विकास की चर्चा में अक्सर उल्लेखित मॉडल है।