📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Veekthedragon
टेक्नोलॉजी
हरियाणा के भाजपा प्रमुख ने हाइड्रोजन ट्रेन में सफ़र किया, दिल्ली को अगला पड़ाव कहा
✍️ The Times of India
🗓 24 सित. 2026, 04:03 AM
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हरियाणा के भाजपा प्रमुख ने हाइड्रोजन‑ईंधन वाली ट्रेन में सफ़र किया और बताया कि यह सेवा जल्द ही दिल्ली तक पहुँचेगी।
इस सप्ताह के शुरुआती दिनों में हरियाणा के भाजपा प्रमुख ने हाइड्रोजन‑संचालित ट्रेन में सवार होकर नई इको‑फ्रेंडली रेल तकनीक का प्रदर्शन किया। यह यात्रा राज्य के भीतर एक परीक्षण मार्ग पर की गई, जिसका उद्देश्य भारतीय रेलवे में हाइड्रोजन को वैकल्पिक ईंधन के रूप में अपनाने की संभावनाओं को उजागर करना था।
ट्रेन में स्थापित फ्यूल‑सेल मॉड्यूल हाइड्रोजन से बिजली उत्पन्न करते हैं और केवल जल वाष्प छोड़ते हैं, जिससे रेल परिवहन का कार्बन फुटप्रिंट काफी घटता है। अधिकारियों ने बताया कि यह प्रोटोटाइप एक ही हाइड्रोजन टैंक से लगभग 200 किलोमीटर तक चल सकता है, जो डीज़ल इकाइयों के प्रदर्शन के बराबर है।
सफ़र के दौरान भाजपा प्रमुख ने कहा कि इस सेवा का अगला चरण राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तक विस्तारित किया जाएगा, जिससे प्रमुख रेल मार्गों पर हाइड्रोजन‑आधारित ट्रेनों का परिचय संभव हो सकेगा। यह घोषणा परिवहन क्षेत्र में ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण और भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं के साथ संरेखण को दर्शाती है।
यदि दिल्ली कनेक्शन की योजना के अनुसार कार्यान्वित हो जाता है, तो यह उत्तर भारत में हाइड्रोजन ट्रेनों के नेटवर्क का मार्ग प्रशस्त कर सकता है, जिससे यात्रियों और माल दोनों के लिए स्वच्छ विकल्प उपलब्ध होगा।
ट्रेन में स्थापित फ्यूल‑सेल मॉड्यूल हाइड्रोजन से बिजली उत्पन्न करते हैं और केवल जल वाष्प छोड़ते हैं, जिससे रेल परिवहन का कार्बन फुटप्रिंट काफी घटता है। अधिकारियों ने बताया कि यह प्रोटोटाइप एक ही हाइड्रोजन टैंक से लगभग 200 किलोमीटर तक चल सकता है, जो डीज़ल इकाइयों के प्रदर्शन के बराबर है।
सफ़र के दौरान भाजपा प्रमुख ने कहा कि इस सेवा का अगला चरण राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तक विस्तारित किया जाएगा, जिससे प्रमुख रेल मार्गों पर हाइड्रोजन‑आधारित ट्रेनों का परिचय संभव हो सकेगा। यह घोषणा परिवहन क्षेत्र में ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण और भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं के साथ संरेखण को दर्शाती है।
यदि दिल्ली कनेक्शन की योजना के अनुसार कार्यान्वित हो जाता है, तो यह उत्तर भारत में हाइड्रोजन ट्रेनों के नेटवर्क का मार्ग प्रशस्त कर सकता है, जिससे यात्रियों और माल दोनों के लिए स्वच्छ विकल्प उपलब्ध होगा।