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हरदोई में कार-बाइक पर फर्जी “प्रेस” लिखकर दिखा रहे जलवा! कानून से बचने की कोशिश का आरोप
हरदोई। जिले में कार और बाइक पर “प्रेस” लिखकर घूमने का मामला चर्चा में है। आरोप है कि कुछ लोग पत्रकारिता से वास्तविक रूप से जुड़े बिना अपने वाहनों पर “प्रेस” लिखकर रौब दिखा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर इसे लेकर सवाल उठने लगे हैं कि आखिर इन वाहनों पर “प्रेस” लिखने का आधार क्या है?
सूत्रों के अनुसार, कुछ वाहनों पर बड़े-बड़े अक्षरों में “प्रेस” लिखा दिखाई देता है। आरोप यह भी है कि इसका इस्तेमाल पुलिस चेकिंग, वाहन संबंधी कार्रवाई अथवा अन्य परिस्थितियों में प्रभाव दिखाने और कानून से बचने के प्रयास के रूप में किया जा सकता है।
मामला केवल वाहन पर एक शब्द लिखे होने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे वास्तविक पत्रकारों की पहचान और पत्रकारिता की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े होते हैं। यदि कोई व्यक्ति पत्रकारिता से जुड़ा नहीं है और फिर भी “प्रेस” लिखकर सरकारी विभागों या आम लोगों के बीच खुद को पत्रकार के रूप में प्रस्तुत करता है, तो पूरे मामले की जांच आवश्यक हो जाती है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि पुलिस और संबंधित विभाग जिले में ऐसे वाहनों की जांच करें, जिन पर “प्रेस” लिखा हुआ है। वाहन स्वामी का पत्रकारिता से संबंध, वाहन पर “प्रेस” लिखने का आधार और इसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा है—इन सभी बिंदुओं की जांच की जाए।
हालांकि, अभी किसी विशेष वाहन या व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित वाहन स्वामियों का पक्ष भी सामने नहीं आया है। इसलिए मामले की वास्तविक स्थिति निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
बड़ा सवाल: अगर पत्रकारिता से कोई संबंध नहीं है, तो आखिर वाहन पर “प्रेस” लिखने की जरूरत क्यों? क्या यह सिर्फ रौब दिखाने का जरिया है या फिर कार्रवाई से बचने का प्रयास? अब निगाहें जिम्मेदार विभाग की जांच और कार्रवाई पर टिकी हैं।
सूत्रों के अनुसार, कुछ वाहनों पर बड़े-बड़े अक्षरों में “प्रेस” लिखा दिखाई देता है। आरोप यह भी है कि इसका इस्तेमाल पुलिस चेकिंग, वाहन संबंधी कार्रवाई अथवा अन्य परिस्थितियों में प्रभाव दिखाने और कानून से बचने के प्रयास के रूप में किया जा सकता है।
मामला केवल वाहन पर एक शब्द लिखे होने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे वास्तविक पत्रकारों की पहचान और पत्रकारिता की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े होते हैं। यदि कोई व्यक्ति पत्रकारिता से जुड़ा नहीं है और फिर भी “प्रेस” लिखकर सरकारी विभागों या आम लोगों के बीच खुद को पत्रकार के रूप में प्रस्तुत करता है, तो पूरे मामले की जांच आवश्यक हो जाती है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि पुलिस और संबंधित विभाग जिले में ऐसे वाहनों की जांच करें, जिन पर “प्रेस” लिखा हुआ है। वाहन स्वामी का पत्रकारिता से संबंध, वाहन पर “प्रेस” लिखने का आधार और इसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा है—इन सभी बिंदुओं की जांच की जाए।
हालांकि, अभी किसी विशेष वाहन या व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित वाहन स्वामियों का पक्ष भी सामने नहीं आया है। इसलिए मामले की वास्तविक स्थिति निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
बड़ा सवाल: अगर पत्रकारिता से कोई संबंध नहीं है, तो आखिर वाहन पर “प्रेस” लिखने की जरूरत क्यों? क्या यह सिर्फ रौब दिखाने का जरिया है या फिर कार्रवाई से बचने का प्रयास? अब निगाहें जिम्मेदार विभाग की जांच और कार्रवाई पर टिकी हैं।