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07 Oct 2026•
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हजारीबाग के दूधमटिया में वन रक्षाबंधन मेला, डीसी हेमंत सती ने बांधी वृक्षों को राखी

✍️ Reporter: Rohit Kumar Yadav 🗓 07 Oct 2026, 09:14 PM 👁 9
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हजारीबाग जिले के दूधमटिया टाटीझरिया में आयोक्त वन रक्षाबंधन सह पर्यावरण मेले में डीसी हेमंत सती द्वारा वन संरक्षण पर जोर दिया गया। उन्होंने स्कूली बच्चों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए पर्यावरण बचाने को सामूहिक जिम्मेदारी बताया और वृद्धावस्था में बदलाव की अपील की।

हजारेबाग जिले के डीसी हेमंत सती बुधवार को दूधमटिाा टीटीझरिया में आयोक्त वन रक्षाबंधन सह पर्यावरण मेले में शामिल हुए। उन्होंने मेला की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए वृक्षों को राखी बधी और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि व्रिााे केवल प्रकृति का हिस्सा नहीं, बलक़ी मानव जीवन और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की नींव हैं。

डीसी हेमंत सती ने मेला परिसर में स्कूली बच्चों द्वारा जलवायु परिवर्तन एवं प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूकता को लेकर लगाए गए विभिन्न स्टॉल का अवलोकन किया। उन्होंने बच्चों से संवाद करते हुए उनके द्वारा प्रस्तुत कला, रचनात्मकता एवं प्रकृति संरक्षण से जुड़े संदेशों की सराहना की और इसे समाज के लिए सकारात्मक प्रयास बताया गया था। इसके उपरान्त मंाच पर जिला प्रकृतिक समिति के सदस्यों द्वारा डीसी श्री सती के स्वागत किया गया और उन्हें शोअल एवं स्मृति चिह्न भेंट किया गया।

मेले के संबोधन में डीसी ने प्रकृतिक संरक्षण के उद्देश्य से श्री महादेव महतो द्वारा शुरू की गई वृक्षों के रक्षाबंधन की परंपरा की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज पूरा विश्व जलवायु परिवर्तन और प्रकृतिक असंतुलन की चुनौती का सामना कर रहा है, ऐसे में प्रकृतिक संरक्षण केवल किसी एक विभाग या संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि प्रकृतिक संरक्षण के लिए हमें अपने व्यवहार और जीवनशैली में भी आवश्यक बदलाव लाने होंगे। वृक्षों की रक्षा एवं अधिक से अधिक पौधरोपण के साथ-साथ जलस्रोतों, जंगलों, पहाड़ों, झरनों, नदियों, झीलों तथा वन्यजीवों का संरक्षण भी हमारी जिम्मेदारी है।

डीसी श्री सती ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग प्रकृति और प्राकृतिक संसाधनों के अधिक करीब हैं, इसलिए ग्रामीण समुदाय प्रकृतिक संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रकृतिक संरक्षण किसी एक दिन या किसी एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं होना चाहिए, यह निरंतर चलने वाला जन-अभियान है। बच्चों और युवाओं को प्रकृतिक संरक्षण से जोड़ना इस दिशा में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि आज की जागरूक पीढ़ी ही आने वाले समय में प्रकृति के प्रति जिम्मेदार समाज का निर्माण करेगी। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि वे अपने आस-पास के प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करें, अनावश्यक रूप से पेड़ों की कटाई न होने दें तथा प्रकृतिक संरक्षण के लिए दूसरों को भी जागरूक करें।

वन रक्षाबंधन सह प्रकृतिक मेले में स्कूली बच्चों के लिए क्विज, निबंध एवं पेंटिंग प्रतियोगिता आयोजित की गई। विभिन्न स्कूलों, कॉलेजों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं झांकियों के माध्यम से प्रकृतिक संरक्षण के संदेश प्रस्तुत किए गए। मेला परिसर में सरकारी, गैर-सरकारी एवं स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा विभिन्न जागरूकता स्टॉल लगाए गए। इस दौरान वृक्षों का रक्षाबंधन किया गया तथा बीएसएफ मेरु द्वारा बैंड की प्रस्तुति दी गई। जिला जनसंपर्क कार्यालय के सौजन्य से प्रकृतिक संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से नुक्कड़ नाटक एवं एलईडी स्क्रीन के माध्यम से जागरूकता संदेश प्रसारित किए गए।
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