📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Georg Morgenstierne
शिक्षा
ग्वालियर के शिक्षक टीईटी विरोध में धरना, 1.5 लाख में केवल 30,000 आवेदन
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 29 सित. 2026, 03:36 PM
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ग्वालियर के शिक्षक टीईटी के खिलाफ तीसरे दिन धरना जारी रखते हुए दावा करते हैं कि 1.5 लाख योग्य शिक्षकों में से केवल 30,000 ने 5 अक्टूबर की डेडलाइन से पहले आवेदन किया है।
ग्वालियर-चंबल विभाग के शिक्षकों ने टीईटी के खिलाफ तीसरे दिन धरना जारी रखा, नीलम पार्क में एकत्रित होकर अपनी चिंताएँ व्यक्त कीं। संयुक्त मोर्चा का दावा है कि प्रदेश के लगभग 1.5 लाख योग्य शिक्षकों में से केवल 30,000 ने आवेदन किया है, जो अपेक्षित संख्या से काफी कम है।
यह प्रदर्शन 5 अक्टूबर की टीईटी आवेदन की अंतिम तिथि से पहले आयोजित किया गया है। शिक्षकों के अनुसार, कम आवेदन दर वर्तमान परीक्षा प्रक्रिया में भ्रम और असंतोष को दर्शाती है। कई प्रतिभागियों ने फॉर्म न भरने का निर्णय लिया है, क्योंकि वे प्रक्रिया को अस्पष्ट और अनुचित मानते हैं।
शिक्षक संघ ने टीईटी दिशानिर्देशों की समीक्षा और अधिक पारदर्शी आवेदन प्रक्रिया की मांग की है। उनका तर्क है कि वर्तमान व्यवस्था योग्य शिक्षकों को भाग लेने से हतोत्साहित कर रही है, जिससे राज्य की शिक्षण गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है।
इस धरने ने स्थानीय मीडिया और शिक्षा अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया है, जो अंतिम तिथि से पहले शिक्षकों के साथ संवाद करने की उम्मीद है।
प्रदर्शन को पूरे मध्यप्रदेश के अन्य शिक्षकों का समर्थन मिला है, जो टीईटी के कार्यान्वयन पर व्यापक चिंता को दर्शाता है।
यह प्रदर्शन 5 अक्टूबर की टीईटी आवेदन की अंतिम तिथि से पहले आयोजित किया गया है। शिक्षकों के अनुसार, कम आवेदन दर वर्तमान परीक्षा प्रक्रिया में भ्रम और असंतोष को दर्शाती है। कई प्रतिभागियों ने फॉर्म न भरने का निर्णय लिया है, क्योंकि वे प्रक्रिया को अस्पष्ट और अनुचित मानते हैं।
शिक्षक संघ ने टीईटी दिशानिर्देशों की समीक्षा और अधिक पारदर्शी आवेदन प्रक्रिया की मांग की है। उनका तर्क है कि वर्तमान व्यवस्था योग्य शिक्षकों को भाग लेने से हतोत्साहित कर रही है, जिससे राज्य की शिक्षण गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है।
इस धरने ने स्थानीय मीडिया और शिक्षा अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया है, जो अंतिम तिथि से पहले शिक्षकों के साथ संवाद करने की उम्मीद है।
प्रदर्शन को पूरे मध्यप्रदेश के अन्य शिक्षकों का समर्थन मिला है, जो टीईटी के कार्यान्वयन पर व्यापक चिंता को दर्शाता है।