📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Jogindergurjar
धर्म
केकड़ी में गुर्जर समाज ने दीपावली पर तालाबों में पितरों का तर्पण किया
✍️ Amar Ujala · Ajmer
🗓 08 नव. 2026, 04:15 PM
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दीपावली के अवसर पर राजस्थान के केकड़ी में गुर्जर समाज ने तालाबों में पितरों का तर्पण कर अपनी सदियों पुरानी परंपरा निभाई।
राजस्थान के अजमेर जिले के केकड़ी में गुर्जर समाज ने दीपावली के अवसर पर कई तालाबों में पितरों का तर्पण करने की प्राचीन परंपरा को दोहराया। परिवारों ने जलाशयों के किनारे इकट्ठा होकर पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जो कई पीढ़ियों से चलती आ रही है।
तर्पण के दौरान खीर‑चूरमे का भोग तैयार किया गया, जिसे तालाब में तैराते हुए पितरों को अर्पित किया गया। अनुष्ठान में आंधी‑झाड़ा की बेल का उपयोग भी किया गया, जो जीवित और मृतकों के बीच संबंध को दर्शाता है।
नवजात शिशुओं का स्वागत गुड़ बांटकर किया गया, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना की गई। इस प्रकार की रस्में गुर्जर समुदाय में सामाजिक एकता को मजबूत करती हैं और दीपावली जैसे बड़े त्यौहारों पर स्थानीय संस्कृति को जीवित रखती हैं।
स्थानीय बुजुर्गों ने कहा कि इस तरह के अनुष्ठान क्षेत्र की समृद्ध लोक परम्पराओं को संजोने और अगली पीढ़ी तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
तर्पण के दौरान खीर‑चूरमे का भोग तैयार किया गया, जिसे तालाब में तैराते हुए पितरों को अर्पित किया गया। अनुष्ठान में आंधी‑झाड़ा की बेल का उपयोग भी किया गया, जो जीवित और मृतकों के बीच संबंध को दर्शाता है।
नवजात शिशुओं का स्वागत गुड़ बांटकर किया गया, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना की गई। इस प्रकार की रस्में गुर्जर समुदाय में सामाजिक एकता को मजबूत करती हैं और दीपावली जैसे बड़े त्यौहारों पर स्थानीय संस्कृति को जीवित रखती हैं।
स्थानीय बुजुर्गों ने कहा कि इस तरह के अनुष्ठान क्षेत्र की समृद्ध लोक परम्पराओं को संजोने और अगली पीढ़ी तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।