📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Bdmshiva
अपराध
सरकारी पंप रूम को पेंगलिन के सुरक्षित आश्रय के रूप में इस्तेमाल, छत्तीसगढ़‑ओडिशा में 3 गिरफ्तार
✍️ The Times of India
🗓 25 अग. 2026, 12:02 AM
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अधिकारियों ने सरकारी पंप रूम को जीवित पेंगलिन के अस्थायी आश्रय के रूप में पाया और छत्तीसगढ़‑ओडिशा में समन्वित छापों में तीन लोगों को गिरफ्तार किया।
छत्तीसगढ़ और ओडिशा की वन्यजीव अपराध इकाइयों ने एक साथ कार्रवाई की, जब जानकारी मिली कि सरकारी पंप रूम को जीवित पेंगलिन को छिपाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची‑I में सूचीबद्ध इस पेंगलिन को सुविधा में पाया गया और तुरंत वन विभाग के अभयारण्य में स्थानांतरित किया गया।
छापे के दौरान, जांचकर्ताओं ने अवैध वन्यजीव व्यापार में संलिप्त तीन व्यक्तियों को हिरासत में लिया। इन तीनों को आगे की पूछताछ के लिए हिरासत में रखा गया है और वे संभवतः 1972 के वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत दंडनीय कार्रवाई का सामना करेंगे।
यह कार्रवाई राज्य अधिकारियों की बढ़ती सतर्कता को दर्शाती है, जो लुप्तप्राय प्रजातियों के तस्करी को रोकने के लिए की जा रही है। अधिकारियों ने कहा कि सरकारी इमारतों के दुरुपयोग को रोकने के लिए निगरानी जारी रहेगी और जनता से किसी भी संदिग्ध वन्यजीव गतिविधि की सूचना देने का आग्रह किया गया है।
बचाए गए पेंगलिन को पशु चिकित्सकीय देखभाल प्रदान की जाएगी और फिर उसके प्राकृतिक आवास में पुनः छोड़ दिया जाएगा, जैसा कि वन विभाग ने बताया।
तीनों की गिरफ्तारी छत्तीसगढ़‑ओडिशा के बीच वन्यजीव अपराध को रोकने के समन्वित प्रयास को रेखांकित करती है, जिसे हालिया राष्ट्रीय एंटी‑पॉइज़न निर्देशों में प्रमुखता दी गई है।
छापे के दौरान, जांचकर्ताओं ने अवैध वन्यजीव व्यापार में संलिप्त तीन व्यक्तियों को हिरासत में लिया। इन तीनों को आगे की पूछताछ के लिए हिरासत में रखा गया है और वे संभवतः 1972 के वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत दंडनीय कार्रवाई का सामना करेंगे।
यह कार्रवाई राज्य अधिकारियों की बढ़ती सतर्कता को दर्शाती है, जो लुप्तप्राय प्रजातियों के तस्करी को रोकने के लिए की जा रही है। अधिकारियों ने कहा कि सरकारी इमारतों के दुरुपयोग को रोकने के लिए निगरानी जारी रहेगी और जनता से किसी भी संदिग्ध वन्यजीव गतिविधि की सूचना देने का आग्रह किया गया है।
बचाए गए पेंगलिन को पशु चिकित्सकीय देखभाल प्रदान की जाएगी और फिर उसके प्राकृतिक आवास में पुनः छोड़ दिया जाएगा, जैसा कि वन विभाग ने बताया।
तीनों की गिरफ्तारी छत्तीसगढ़‑ओडिशा के बीच वन्यजीव अपराध को रोकने के समन्वित प्रयास को रेखांकित करती है, जिसे हालिया राष्ट्रीय एंटी‑पॉइज़न निर्देशों में प्रमुखता दी गई है।