📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Unknown authorUnknown author
मौसम
गोपलगंज में बाढ़ का पानी उतर गया, लेकिन कीचड़‑दुर्गंध से घर वापसी कठिन
✍️ Amar Ujala · Bihar
🗓 07 अक्टू. 2026, 04:01 PM
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बाढ़ के पानी के उतरने के बाद बिहार के गोपालगंज में परिवारों को कीचड़‑भरी सड़कों, दुर्गंध और बिखरे घरों को फिर से बनाने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
पिछले हफ्ते की तेज़ बारिश ने कोसी की सहायक नदियों को उफान पर ला दिया, जिससे बिहार के गोपालगंज जिले के कई गाँव डूब गए। गुरुवार तक अधिकांश बाढ़ का पानी उतर चुका है, परन्तु जमीन पर गादे और मलबे की लकीरें बची हुई हैं।
पानी के उतरने के बाद भी कई घरों की दीवारें फट चुकी हैं, छतें ध्वस्त हो गई हैं और सड़कों पर मोटा कीचड़ जमा हो गया है। खड़े‑खड़े पानी से निकलने वाली तीव्र दुर्गंध ने दैनिक जीवन को कठिन बना दिया है।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि गंदा पानी जलजनित रोगों जैसे दस्त और हैजा का कारण बन सकता है। उन्होंने लोगों से अपशिष्ट जल को पीने से बचने, उबाल कर या क्लोरीन मिलाकर पानी का उपयोग करने का आग्रह किया है।
जिला प्रशासन ने साफ‑सुथरा पानी, कीटाणुशोधन किट और अस्थायी आश्रय सामग्री वितरित करना शुरू कर दिया है। साथ ही, घरों की पुनर्निर्माण योजना तैयार करने का काम चल रहा है, लेकिन इसे पूर्ण होने में कई हफ्ते लग सकते हैं।
जैसे ही प्रभावित परिवार अपने क्षतिग्रस्त घरों में लौट रहे हैं, वे दीर्घकालिक पुनर्स्थापना और मरम्मत की चुनौती का सामना कर रहे हैं, और आशा कर रहे हैं कि सरकार का त्वरित सहयोग इस आपदा के प्रभाव को कम कर सकेगा।
पानी के उतरने के बाद भी कई घरों की दीवारें फट चुकी हैं, छतें ध्वस्त हो गई हैं और सड़कों पर मोटा कीचड़ जमा हो गया है। खड़े‑खड़े पानी से निकलने वाली तीव्र दुर्गंध ने दैनिक जीवन को कठिन बना दिया है।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि गंदा पानी जलजनित रोगों जैसे दस्त और हैजा का कारण बन सकता है। उन्होंने लोगों से अपशिष्ट जल को पीने से बचने, उबाल कर या क्लोरीन मिलाकर पानी का उपयोग करने का आग्रह किया है।
जिला प्रशासन ने साफ‑सुथरा पानी, कीटाणुशोधन किट और अस्थायी आश्रय सामग्री वितरित करना शुरू कर दिया है। साथ ही, घरों की पुनर्निर्माण योजना तैयार करने का काम चल रहा है, लेकिन इसे पूर्ण होने में कई हफ्ते लग सकते हैं।
जैसे ही प्रभावित परिवार अपने क्षतिग्रस्त घरों में लौट रहे हैं, वे दीर्घकालिक पुनर्स्थापना और मरम्मत की चुनौती का सामना कर रहे हैं, और आशा कर रहे हैं कि सरकार का त्वरित सहयोग इस आपदा के प्रभाव को कम कर सकेगा।