📷 चित्र स्रोत: Times of India (via NewsData)
टेक्नोलॉजी
गूगल ने गूगल अर्थ से एआई इमेज जनरेटर हटाया, गलत सूचना के डर से
✍️ Times of India
🗓 01 अग. 2026, 09:40 PM
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गूगल ने गूगल अर्थ से एआई इमेज जनरेटर हटा दिया, शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी कि यह नकली उपग्रह चित्र बना सकता है। कंपनी ने मजबूत सुरक्षा उपाय जोड़ने और टूल को रोकने का निर्णय लिया।
2024 में गूगल ने गूगल अर्थ से एआई इमेज जनरेटर को हटा दिया, जब शोधकर्ताओं ने तुरंत इसकी संभावित गलत सूचना जोखिमों के बारे में चेतावनी दी। यह फीचर थोड़े समय के लिए उपलब्ध रहा था।
विशेषज्ञों ने बताया कि यह टूल वास्तविक दिखने वाले उपग्रह चित्र बना सकता है, जिन्हें सार्वजनिक भ्रम पैदा करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, खासकर संवेदनशील भू-राजनीतिक मामलों में। ऐसे चित्रों के निर्माण से नकली जानकारी के प्रसार की संभावना बढ़ जाती है।
गूगल ने कहा कि सभी उत्पन्न चित्रों पर एआई‑निर्मित होने का वॉटरमार्क लगा हुआ था, परंतु वह वॉटरमार्क हटाया या अनदेखा किया जा सकता है। इस प्रतिक्रिया में कंपनी ने टूल को अस्थायी रूप से रोक दिया है और नीतियों की समीक्षा के दौरान मजबूत सुरक्षा उपाय लागू कर रही है।
यह घटना एआई‑जनित सामग्री के बढ़ते चिंताओं को उजागर करती है और मजबूत सत्यापन तंत्र की आवश्यकता पर बल देती है। विश्लेषकों का मानना है कि इसी तरह के टूल को राज्य और गैर‑राज्य अभिनेताओं द्वारा दुरुपयोग किया जा सकता है, जिससे स्पष्ट नियामक ढांचे की मांग बढ़ रही है।
विशेषज्ञों ने बताया कि यह टूल वास्तविक दिखने वाले उपग्रह चित्र बना सकता है, जिन्हें सार्वजनिक भ्रम पैदा करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, खासकर संवेदनशील भू-राजनीतिक मामलों में। ऐसे चित्रों के निर्माण से नकली जानकारी के प्रसार की संभावना बढ़ जाती है।
गूगल ने कहा कि सभी उत्पन्न चित्रों पर एआई‑निर्मित होने का वॉटरमार्क लगा हुआ था, परंतु वह वॉटरमार्क हटाया या अनदेखा किया जा सकता है। इस प्रतिक्रिया में कंपनी ने टूल को अस्थायी रूप से रोक दिया है और नीतियों की समीक्षा के दौरान मजबूत सुरक्षा उपाय लागू कर रही है।
यह घटना एआई‑जनित सामग्री के बढ़ते चिंताओं को उजागर करती है और मजबूत सत्यापन तंत्र की आवश्यकता पर बल देती है। विश्लेषकों का मानना है कि इसी तरह के टूल को राज्य और गैर‑राज्य अभिनेताओं द्वारा दुरुपयोग किया जा सकता है, जिससे स्पष्ट नियामक ढांचे की मांग बढ़ रही है।