📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Judgefloro
स्वास्थ्य
गोवा के असिलो, मापुसा में सरकारी अस्पताल में पहला एआई‑सहायता वाला घुटना प्रतिस्थापन
✍️ eHealth Magazine
🗓 28 अक्टू. 2026, 06:36 AM
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असिलो, मापुसा के सरकारी अस्पताल में गोवा का पहला एआई‑सहायता वाला घुटना प्रतिस्थापन सफलतापूर्वक किया गया, जो राज्य में चिकित्सा प्रौद्योगिकी के एक नए चरण को दर्शाता है।
असिलो, मापुसा के सरकारी अस्पताल ने गोवा में पहला एआई‑सहायता वाला घुटना प्रतिस्थापन ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया। इस सर्जरी में ऑर्थोपेडिक सर्जनों ने कृत्रिम‑बुद्धिमत्ता आधारित इमेजिंग और प्लानिंग टूल्स का उपयोग करके हड्डी की संरेखण और इम्प्लांट की स्थिति को सटीक बनाया।
अस्पताल के अनुसार, एआई सिस्टम ने रोगी की प्री‑ऑपरेटिव स्कैनिंग का विश्लेषण कर 3‑डी मॉडल तैयार किया और इम्प्लांट का आकार व स्थिति सुझाई। सर्जनों ने इन सुझावों को ऑपरेशन के दौरान सत्यापित किया, जिससे प्रक्रिया अधिक सटीक और तेज़ हुई।
यह सफलता गोवा के सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में तकनीकी उन्नति का प्रतीक मानी जा रही है, जो दर्शाती है कि उन्नत डिजिटल तकनीकें निजी संस्थानों के बिना भी सरकारी अस्पतालों में लागू की जा सकती हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि दीर्घकालिक पुनर्प्राप्ति डेटा के आधार पर इस मॉडल को आगे विस्तारित किया जाएगा।
इ‑हेल्थ मैगज़ीन ने बताया कि यह कदम भारत में एआई को क्लिनिकल वर्कफ़्लो में शामिल करने के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य सर्जिकल परिणामों को बेहतर बनाना और पोस्ट‑ऑपरेटिव जटिलताओं को कम करना है।
ऑपरेशन में शामिल रोगी की पहचान गोपनीय रखी गई है, लेकिन रिपोर्टों के अनुसार वह वर्तमान में फिजियोथेरेपी के तहत सामान्य रूप से ठीक हो रहा है।
अस्पताल के अनुसार, एआई सिस्टम ने रोगी की प्री‑ऑपरेटिव स्कैनिंग का विश्लेषण कर 3‑डी मॉडल तैयार किया और इम्प्लांट का आकार व स्थिति सुझाई। सर्जनों ने इन सुझावों को ऑपरेशन के दौरान सत्यापित किया, जिससे प्रक्रिया अधिक सटीक और तेज़ हुई।
यह सफलता गोवा के सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में तकनीकी उन्नति का प्रतीक मानी जा रही है, जो दर्शाती है कि उन्नत डिजिटल तकनीकें निजी संस्थानों के बिना भी सरकारी अस्पतालों में लागू की जा सकती हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि दीर्घकालिक पुनर्प्राप्ति डेटा के आधार पर इस मॉडल को आगे विस्तारित किया जाएगा।
इ‑हेल्थ मैगज़ीन ने बताया कि यह कदम भारत में एआई को क्लिनिकल वर्कफ़्लो में शामिल करने के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य सर्जिकल परिणामों को बेहतर बनाना और पोस्ट‑ऑपरेटिव जटिलताओं को कम करना है।
ऑपरेशन में शामिल रोगी की पहचान गोपनीय रखी गई है, लेकिन रिपोर्टों के अनुसार वह वर्तमान में फिजियोथेरेपी के तहत सामान्य रूप से ठीक हो रहा है।