📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Myrabella
कृषि
गोवा की किशोरी ग्रेस दे सूज़ा ने गर्मियों में मोरिंगा पेड़ों पर काम किया
✍️ The Times of India
🗓 31 अक्टू. 2026, 04:53 PM
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13 साल की गोवा की ग्रेस दे सूज़ा ने अपनी गर्मी की छुट्टियों में मोरिंगा पेड़ों की देखभाल की, जिससे स्थानीय कृषि में युवा भागीदारी पर प्रकाश पड़ा।
13 साल की गोवा की छात्रा ग्रेस दे सूज़ा ने अपनी गर्मी की छुट्टियों को मोरिंगा पेड़ों की देखभाल में बिताया। वह पेड़ों को लगाना, छंटाई करना और पोषण देना जैसी बुनियादी कृषि गतिविधियों में लगी, जिससे मोरिंगा के पोषक लाभों को बढ़ावा मिला।
स्थानीय मीडिया ने इस पहल को युवा वर्ग की सतत कृषि में भागीदारी का उदाहरण बताया। पेड़ की खेती सीखकर ग्रेस ने व्यावहारिक कौशल प्राप्त किया और मोरिंगा के पत्तों व फलों के स्वास्थ्य लाभों को उजागर किया।
समुदाय के लोगों ने उसकी कोशिश की सराहना की, यह कहते हुए कि बच्चों को कृषि कार्यों में जोड़ने से पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ती है। ग्रेस के माता‑पिता ने कहा कि इस अनुभव ने उसे भविष्य में कृषि या संबंधित क्षेत्रों में रुचि दिलाई है।
यह कहानी भारत में युवा वर्ग के कृषि‑आधारित कार्यों में बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है, विशेषकर गोवा जैसे क्षेत्रों में जहाँ मोरिंगा जैसे उच्च मूल्य वाले पेड़ परंपरागत फसलों के साथ उभर रहे हैं।
राज्य के कृषि विभाग के अधिकारियों ने समान पहलों के लिए समर्थन व्यक्त किया है, स्कूलों और परिवारों को ऐसे पौधों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है जो पोषण और आय दोनों को बढ़ा सकते हैं।
स्थानीय मीडिया ने इस पहल को युवा वर्ग की सतत कृषि में भागीदारी का उदाहरण बताया। पेड़ की खेती सीखकर ग्रेस ने व्यावहारिक कौशल प्राप्त किया और मोरिंगा के पत्तों व फलों के स्वास्थ्य लाभों को उजागर किया।
समुदाय के लोगों ने उसकी कोशिश की सराहना की, यह कहते हुए कि बच्चों को कृषि कार्यों में जोड़ने से पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ती है। ग्रेस के माता‑पिता ने कहा कि इस अनुभव ने उसे भविष्य में कृषि या संबंधित क्षेत्रों में रुचि दिलाई है।
यह कहानी भारत में युवा वर्ग के कृषि‑आधारित कार्यों में बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है, विशेषकर गोवा जैसे क्षेत्रों में जहाँ मोरिंगा जैसे उच्च मूल्य वाले पेड़ परंपरागत फसलों के साथ उभर रहे हैं।
राज्य के कृषि विभाग के अधिकारियों ने समान पहलों के लिए समर्थन व्यक्त किया है, स्कूलों और परिवारों को ऐसे पौधों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है जो पोषण और आय दोनों को बढ़ा सकते हैं।